बस्तर

बस्तर पुलिस ने एक वर्ष में मार गिराए 132 लाल लड़ाकू
16-Nov-2022 8:44 PM
बस्तर पुलिस ने एक वर्ष में मार गिराए 132 लाल लड़ाकू

दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी इलाका में 89 माओवादी कैडर की मृत्यु भी स्वीकारी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर, 16 नवंबर।
बस्तर पुलिस के द्वारा नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान 1 वर्ष के भीतर सैकड़ा के लगभग नक्सलियों के लाल लड़ाकू को मार गिराने में सफलता हासिल की है। 

इसकी पुष्टि नक्सलियों ने की है, जिसमें नक्सलियों ने बताया कि प्रतिबंधित एवं गैर कानूनी सीपीआई माओवादी संगठन ने स्वीकार किया कि वर्ष 2021-22 में बड़ा झटका लगा। इस अवधि में 132 माओवादी कैडर की मृत्यु होने की बात भी स्वीकार किया।

वर्ष 2021-22 में सिर्फ दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी ईलाका में 89 माओवादी कैडर की मृत्यु की बात को माओवादियों ने पीएलजीए की 22वीं वर्षगांठ के अवसर पर जारी किए गए प्रेस नोट में जिक्र किया गया है।

उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष दिसम्बर 2 से 8 तक सीपीआई माओवादी संगठन के केन्द्रीय सैन्य आयोग  द्वारा पीएलजीए वर्षगांठ सप्ताह के रूप में मनाया जाता है तथा 1 वर्ष की अवधि में विभिन्न मुठभेड़ों में उन्हें हुई नुकसान के संबंध में जानकारी प्रसारित किया गया है। वर्ष 2022 के अवसर पर जारी किए गए 27 पन्ने की पुस्तिका में माओवादियों द्वारा ग्रामीणों को भी पुलिस मुखबिर तथा क्रांतिकारी विरोधी आरोप लगाते हुए मारे जाने की बात का भी उल्लेख किया गया है।

पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज  सुंदरराज पी. द्वारा बताया गया कि माओवादी पीएलजीए के अवसर में जारी किए गए इस पुस्तिका में नक्सल उन्मूलन हेतु क्रियान्वयन किए जा रहे कार्ययोजना के कारण उन्हें भारी नुकसान होने तथा माओवादी संगठन के सफाया होने के डर के कारण उनका बौखलाहट स्पष्ट नजर आ रहा है। जिस तरीके से जनता के मंशानुरूप पुलिस, सुरक्षा बल एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले कोर ईलाका में विगत 3-4 वर्षों में शासन के मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए विकास कार्यों को गति प्रदान की गई है। जिससे नक्सलियों के पैर से जमीन खिसकते जा रही है।

पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज ने बताया कि दुनियाभर में कोई भी आतंकवादी ताकत कमजोर होकर बैकफुट में आने की बौखलाहट के कारण निर्दोष तथा सॉफ्ट टारगेट को निशाना बनाया जाता है, जो उनके खात्मा का कारण बन जाता है। इसी प्रकार बस्तर क्षेत्र में भी नक्सल संगठन में बाहर के माओवादी नेतृत्व द्वारा अपना भविष्य को अंधकार मय होने की स्थिति को देखते हुए माओवादी बौखलाए हुए हैं। दूसरी ओर स्थानीय माओवादी कैडर द्वारा भारी संख्या में हिंसा छोडक़र समाज के मुख्यधारा में शामिल होकर एक सामाजिक एवं शांतिपूर्ण जिंदगी जीने की राह पर है।


अन्य पोस्ट