बलौदा बाजार

मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों की आंखों पर असर, अस्पतालों में बढ़ रहे मामले
11-May-2026 5:00 PM
मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों की आंखों पर असर, अस्पतालों में बढ़ रहे मामले

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 11 मई। मोबाइल फोन का उपयोग अब बच्चों की दिनचर्या का भी हिस्सा बन गया है। पढ़ाई, मनोरंजन और गेम्स के कारण बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है। जिला अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञों के पास पहुंच रहे बच्चों के आंकड़े आंखों से जुड़ी समस्याओं में बढ़ोतरी की ओर संकेत कर रहे हैं।

जिला अस्पताल के अनुसार, इलाज के लिए आने वाले 14 वर्ष तक के बच्चों में करीब 30 प्रतिशत बच्चों की दूर की नजर कमजोर पाई जा रही है। इनमें लगभग 20 प्रतिशत बच्चों को कम उम्र में चश्मा लग चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल फोन और अन्य स्क्रीन का लंबे समय तक उपयोग आंखों पर प्रभाव डाल सकता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक मोबाइल को पास से देखने पर आंखों की फोकस करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे मायोपिया (दूर की नजर कमजोर होना) जैसी समस्या विकसित होने की आशंका बढ़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले यह समस्या अधिकतर किशोरावस्था में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के बच्चों में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।

20-20-20 नियम अपनाने की सलाह
विशेषज्ञ बच्चों के लिए ‘20-20-20’ नियम को उपयोगी मानते हैं। इसके अनुसार, यदि बच्चा 20 मिनट तक स्क्रीन देखता है, तो उसे 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना चाहिए। इससे आंखों को आराम मिल सकता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मिश्रा ने बताया कि अधिक स्क्रीन टाइम के कारण पलक झपकने की प्रक्रिया कम हो जाती है, जिससे आंखों में सूखापन और जलन की समस्या हो सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को खुले वातावरण में खेलने के लिए प्रोत्साहित करना आंखों के लिए लाभकारी हो सकता है।

मानसिक विकास पर असर की भी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम का असर केवल आंखों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और मानसिक विकास पर भी पड़ सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, जीवन के शुरुआती वर्षों में बच्चों का मानसिक विकास तेजी से होता है और इस दौरान अत्यधिक मोबाइल उपयोग से ध्यान और सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
शिक्षकों और अभिभावकों के बीच भी इस विषय को लेकर चिंता बढ़ रही है। स्कूलों में बच्चों में एकाग्रता की कमी और जल्दी थकान जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं, जिनका एक कारण अधिक स्क्रीन टाइम माना जा रहा है।
जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों के मोबाइल उपयोग को सीमित रखें, उन्हें आउटडोर गतिविधियों के लिए प्रेरित करें और समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहें।


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