बलौदा बाजार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 14 जून। बलौदाबाजार जिले की उपजेल में कैदी उमेंद्र बघेल की इलाज के दौरान मौत हो गई। यह घटना 13 जून को सामने आई है। 8 जून को पलारी थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए उमेंद्र बघेल पर आरोप था कि वे ग्राम खैरी में शराब निर्माण में लिप्त थे। गिरफ्तारी के कुछ ही दिनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मृतक की पत्नी शकुन्तला बघेल ने बताया कि उनके पति शराब पीने के आदी थे, लेकिन वे किसी भी प्रकार के शराब व्यापार में संलिप्त नहीं थे। उन्होंने पुलिस और जेल प्रशासन पर अनावश्यक रूप से फंसाने और जेल में मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है।
मेरा पति घर का इकलौता कमाने वाला था। अब हमारे सामने रोज़ी-रोटी का संकट है। सरकार को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और बच्चों के पालन-पोषण का भी प्रबंध करना चाहिए।
क्षेत्रीय विधायक संदीप साहू ने कहा है कि इस मामले की उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही या पुलिस ज्यादती सामने आती है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
घटना के बाद जेल प्रशासन में हडक़ंप मच गया। मृतक का पंचनामा और पोस्टमार्टम न्यायाधीश की उपस्थिति में कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंपा गया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने बताया कि पलारी थाना क्षेत्र के ग्राम खैरी में 8 जून को आबकारी एक्ट के तहत उमेंद्र बघेल सहित छह लोगों को शराब बनाते पकड़ा गया था। उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया था। जेल में उनकी तबीयत खराब होने पर 10 जून को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 13 जून को उनकी मौत हो गई।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट रूप से बताया जा सकेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी पलारी थाना में नया थाना प्रभारी नियुक्त होता है, तो उसकी पहली बड़ी कार्रवाई ग्राम खैरी में होती है।
खैरी गाँव के ग्रामीणों ने बताया कि मृतक एकदम गरीब परिवार से जो रोजमर्रा दिहाड़ी मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करता था। वह शराब की बिक्री नहीं करता था। मृतक पर कोई आपराधिक प्रकरण नहीं है मृतक दिहाड़ी मजदूरी करने के कारण शराब सेवन करता था। पुलिस द्वारा कार्यवाही दिखाने के उद्देश्य से मृतक को जेल भेज दिया गया।
डॉक्टरी प्रक्रिया पर उठे सवाल
बलौदाबाजार उपजेल में बंद कैदी उमेंद्र बघेल की मौत ने प्रशासन और पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, जब 8 जून को उमेंद्र बघेल को शराब निर्माण के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, तो उससे पहले नियमानुसार चिकित्सा अधिकारी द्वारा एमएलसी (मेडिको लीगल केस) जाँच करवाई गई थी, जिसमें उन्हें पूर्णत: ‘सामान्य’ घोषित किया गया था।
जांच की मांग तेज, मेडिकल स्टाफ भी घेरे में
अब परिजनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच की मांग की है, जिसमें न सिर्फ पुलिस और जेल प्रशासन बल्कि एमएलसी तैयार करने वाले चिकित्सकों की भूमिका की भी समीक्षा की जाए।


