बलौदा बाजार
बलौदाबाजार, 12 जनवरी। बलौदाबाजार जिले में स्थापित 7 से 8 सीमेंट संयंत्रों द्वारा कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड के उपयोग को लेकर प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सीएसआर के तहत होने वाले कार्य मुख्य रूप से निर्माण कार्यों तक सीमित रह गए हैं, जबकि सामाजिक सहायता से जुड़े अन्य कार्यों का लाभ हाल के वर्षों में उन्हें नहीं मिल रहा है। प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में कुछ सीमेंट कंपनियां सर्दी के मौसम में गरीब परिवारों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को कंबल, स्वेटर और स्कूल सामग्री का वितरण करती थीं। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 5-6 वर्षों से यह सहायता बंद हो गई है, जबकि ठंड के मौसम में इसकी आवश्यकता बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि सीएसआर फंड का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत लोगों के जीवन स्तर, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक आवश्यकताओं में सहयोग करना भी है।
उनका आरोप है कि वर्तमान में सीएसआर और डीएमएफ योजनाओं के अंतर्गत होने वाले कार्यों की निगरानी प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है, जिससे योजनाओं का लाभ सीमित हो रहा है।
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर रिसदा, ढनढनी, कुकुरदी, सेमहराडीह, पिपराही, सरकीपार, खपराडीह, भरूवाड़ीह, रावन, भद्रापाली, करही, सोनाडीह, रसेड़ा, रसेडी, चूचरुंगपुर, झीपन, औरासी, मोपर, मल्दी, पोसरी सहित अन्य प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि पहले पंचायत प्रतिनिधियों और कंपनी के माध्यम से उन्हें सर्दी के मौसम में सहायता सामग्री मिलती थी, लेकिन अब यह सुविधा नहीं मिल रही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सीएसआर फंड के उपयोग की निगरानी की जाए और प्रभावित गांवों के जरूरतमंद परिवारों, बुजुर्गों एवं बच्चों को योजनाओं का लाभ नियमित रूप से दिया जाए, ताकि सीएसआर का उद्देश्य पूरा हो सके।


