बलौदा बाजार

मनरेगा में बदलाव, गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला-अमितेश शुक्ल
12-Jan-2026 3:45 PM
मनरेगा में बदलाव, गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला-अमितेश शुक्ल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 12 जनवरी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदले जाने को लेकर जिला कांग्रेस कार्यालय में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इस दौरान राजिम विधानसभा से पूर्व विधायक अमितेश शुक्ल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया।

पूर्व विधायक ने कहा कि नए बदलाव से मनरेगा में अब संवैधानिक अधिकार नहीं रह गया है, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित एक सशर्त योजना बताती जा रही हैं। इससे मजदूरों के काम के अधिकार को कमजोर किया जा रहा हैं।  उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों पर लगभग 50 हजार करोड रुपए का आर्थिक बोझ डाल रही है जबकि योजनाओं का श्रेय खुद ले रही हैं।  अमितेश शुक्ल ने कहा कि नए प्रावधानों के तहत तय समय के लिए रोजगार रोका जा सकता हैं जिससे गरीब मजदूरों को महीनों तक काम से वंचित रहना पड़ सकता हैं। पंचायत और ग्राम सभाओं के अधिकार भी छीने जा रहे हैं और उन्हें डिजिटल सिस्टम व केंद्रीयकृत नियंत्रण के तहत लगाया जा रहा हैं।

कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा के साथ हो रहे अन्य को नहीं रोका गया तो पार्टी सडक़ से लेकर संसद तक आंदोलन करेगी और गरीबों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला अध्यक्ष सुमित्रा धृतलहरे, वरिष्ठ कांग्रेस शैलेश नितिन त्रिवेदी, सुरेंद्र शर्मा, दिनेश ठाकुर, हितेन ठाकुर, राकेश वर्मा, संतोष तिवारी, प्रभाकर मिश्रा, अविनाश मिश्रा, अभिषेक पटेल शाश्वत यादव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी उपस्थित थे।

केंद्र सरकार पर बजट कटौती और फंड रोकने के आरोप

अमितेश शुक्ल ने कहा कि मोदी सरकार ने सुधार के नाम पर लोकसभा में एक और विधेयक पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को कमजोर कर दिया हैं। यह महात्मा गांधी की सोच ग्राम स्वराज काम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास की अवधारणा को करने की कोशिश हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि देश के 12 करोड़ से अधिक ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवन रेखा रही हैं। कोविद-19 महामारी के दौरान इस योजना ने लाखों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की थी।  उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मनरेगा के खिलाफ रहे हैं। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने बजट में कटौती की राज्यों का वैधानिक फंड रोका जाब कार्ड हटाए और आधार आधारित भुगतान प्रणाली लागू कर लगभग 7 करोड़ मज़दूर को योजना से बाहर कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि अब मनरेगा के तहत मजदूरों को साल में औसतन केवल 50 से 55 दिन ही काम मिल पा रहा हैं।


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