बलौदा बाजार
40 हजार की अनुमति पर लाखों ईटों का निर्माण
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 5 मई। कसडोल सोनाखान और टुंड्रा तहसीलों में इन दिनों अवैध ईट भट्ठों की बाढ़ सिया गई हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को आवास की स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में ईंट की मांग बढ़ी हैं। इसका फायदा उठाते हुए कई लोगों ने अवैध रूप से व्यावसायिक ईट निर्माण का कार्य काम शुरू कर दिया हैं। इन ईंट भट्ठों से लाखों की संख्या में ईंटे बनाएं और बेची जा रही हैं। जिससे सरकार को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा हैं।
कसडोल तहसील के चांटीपाली, दर्रा, चकरबाय,ख व खरवे असनीद, बिलारी, और आस पास के गांव में बड़े पैमाने पर अवैध ईट भट्ठों संचालित हो रहे हैं। वहीं सोनाखान तहसील सोनाखान, महकम, कसौटी, नवागांव, और टुंड्रा तहसील के नवापारा, परसडीह, कुम्हारी आदि गांव में भी यही स्थिति बनी हुई हैं। खनिज विभाग द्वारा खानापूर्ति के लिए मामले कार्रवाई की जा रही हैं। जिससे अवैध ईंट संचालकों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। नियम कहता है कि घर उपयोग के लिए 4 हजार बना सकते हैं लेकिन यहां दो लाखों ईंट बनाकर बेची जा रही हैं और खनिज विभाग मुख दर्शन बने बैठे हैं।
खनिज उप निरीक्षक भूपेंद्र भगत से इस विषय पर चर्चा की गई तो उन्होंने बताया की चांटीपाली, दर्रा, खरवे और असनीद के कुछ अवैध भट्ठों पर कार्रवाई की गई हैं। इन पर जुर्माना भी लगाया गया है और अब रायल्टी पर्ची जारी करने की प्रक्रिया चल रही हैं। खनिज विभाग जब भारती पर्ची जारी करेगा तब तक अगर ईंट भ_ा संचालक बनाए गए सभी ईंटों को बेचकर दूसरे कार्यों में लग जाएंगे।
सबसे चिंताजनक स्थिति वन क्षेत्र की है जहां अवैध ईट भट्ठों ने पर्यावरण विभाग से कोई अनुमति नहीं ली है और जंगलों से लकड़ी काटकर र्इंट पकाने का कार्य कर रहे हैं। इससे एक और पर्यावरण को गहरा नुकसान हो रहा हैं वहीं दूसरी ओर वनों का भीषन दोहन हो रहा हैं। ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत वन विभाग से की हैं लेकिन वन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई हैं।
अवैध ईंट भ_े के लिए लकड़ी जलाकर वनों का दोहन जारी
बलौदाबाजार वन मंडल के अंतर्गत आने वाले सोनाखान, देवपुर, अर्जुनी और लवन परिक्षेत्र में र्इंट भ_ा संचालक लगातार जंगलों से लड़कियां चुरा रहे हैं परंतु इन क्षेत्रों के वन अधिकारियों ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की हैं।
इससे यह स्पष्ट होता है कि या तो वन विभाग इस मामले में उदासीन है या फिर मिली भगत की स्थिति बन गई हैं। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन अवैध ईंट भट्ठों पर शीघ्र और सख्त कार्रवाई की जाए ताकि राजस्व की हानी को रोका जा सके और वन एवं पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


