सरगुजा
जल संरक्षण के साथ मछली पालन और सब्जी उत्पादन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 29 जनवरी। मनरेगा अंतर्गत निर्मित की जा रही आजीविका डबरी छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन रही है। सिंचाई की सुविधा और आमदनी के नए अवसर ग्राम पंचायत मेंड्राखुर्द निवासी के रहने वाले छोटे किसान बिहारी लाल के खेत में मनरेगा के तहत डबरी निर्माण कार्य किया जा रहा है। योजनांतर्गत 1 लाख 99 हजार रुपए की लागत से निर्मित डबरी का 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। डबरी में वर्षा जल संग्रहित होने से उन्हें फसलों की सिंचाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
बिहारी लाल ने बताया कि डबरी के पानी से वे अब सब्जी की उन्नत खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन भी कर सकेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। उन्होंने इस सुविधा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना उनके जैसे छोटे किसानों के लिए वरदान है। जिले में 438 डबरियों से सुदृढ़ होगा जल प्रबंधन जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन को प्राथमिकता देते हुए जिले में लगभग 438 आजीविका डबरियों का निर्माण कराया जा रहा है। इन डबरियों से जहां एक ओर जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा गिरते भू-जल स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर सिंचाई, मत्स्य पालन जैसी बहुउद्देशीय गतिविधियां संभव होंगी। इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
जल संरक्षण के साथ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन की मंशा अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। आजीविका डबरी जैसी योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं और किसानों को स्थायी आय का स्रोत प्रदान कर रही हैं। इस पहल से न केवल किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी, बल्कि खेती के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ेगा।
उन्होंने बताया कि मेंड्राखुर्द के बिहारी लाल जैसे सैकड़ों किसान अब विकास की मुख्यधारा से जुडक़र आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहे हैं।


