सरगुजा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अम्बिकापुर, 29 जनवरी। सरगुजा जिले में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक के बीच एंटी-रेबीज इंजेक्शन की कमी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। जिले में प्रतिदिन औसतन 10 से 15 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। विगत वर्ष लगभग 4649 लोगों को कुत्तों ने काटा, लेकिन इसके बावजूद जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में एंटी-रेबीज टीकों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। एंटी-रेबीज इंजेक्शन की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने को तैयार सामाजिक कार्यकर्ता व भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ के पूर्व जिला संयोजक कैलाश मिश्रा ने सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
श्री मिश्रा द्वारा बताया गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को बाजार से महंगे दामों पर टीके खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। गंभीर मामलों में आवश्यक इम्युनोग्लोबुलिन (आईआरजी) की सुविधा भी अधिकांश केन्द्रों में उपलब्ध नहीं है। शहरी स्वास्थ्य केन्द्र नवापारा में भी लंबे समय से एंटी-रेबीज इंजेक्शन की कमी बनी हुई है। इस बीच एक ताजा मामले में तीन एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगने के बावजूद एक व्यक्ति की मौत हो जाने से टीकों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना के बाद आमजन में भय और असंतोष का माहौल है।
इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की गई है कि सरगुजा जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में गुणवत्तापरक एंटी-रेबीज इंजेक्शन तथा इम्युनोग्लोबुलिन की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि कुत्तों के काटने से पीडि़त मरीजों को समय पर समुचित इलाज मिल सके और जनहानि की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।


