सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सूरजपुर, 29 मई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सूरजपुर की संवेदनशील पहल से वृद्धाश्रम में रह रहे एक बुजुर्ग दंपत्ति को वर्षों बाद अपनों का साथ मिल गया। पारिवारिक मतभेदों के चलते घर छोडऩे को मजबूर हुए दंपत्ति को उनके परिजन ससम्मान अपने साथ घर ले गए। इस पहल को सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने वाली सराहनीय पहल माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार मूलत: जिला कोरिया के थाना पटना क्षेत्र निवासी शंकर प्रसाद एवं उनकी पत्नी की कोई संतान नहीं है। उन्होंने अपने भाइयों के बच्चों को ही अपनी संतान मानकर जीवन बिताया, लेकिन समय के साथ पारिवारिक विवाद बढऩे पर उन्हें घर छोडक़र सूरजपुर के तिलसिवा स्थित ‘स्नेह सम्बल वृद्धाश्रम’ में आश्रय लेना पड़ा।
25 मई को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सूरजपुर की सचिव पायल टोपनो ने वृद्धाश्रम का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बुजुर्ग दंपत्ति की स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी मिलने पर उन्होंने तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए पहल शुरू की। प्राधिकरण द्वारा परिवारजनों से संपर्क कर उन्हें उनके कानूनी दायित्वों और नैतिक जिम्मेदारियों के संबंध में समझाइश दी गई।
डीएलएसए की काउंसिलिंग और प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया। शंकर प्रसाद के छोटे भाई कृष्णा, उनकी पत्नी सुमित्रा एवं उनका पुत्र स्वयं वृद्धाश्रम पहुंचे और बुजुर्ग दंपत्ति को ससम्मान अपने साथ घर ले जाने की सहमति दी। वर्षों बाद अपनों को सामने देखकर बुजुर्ग दंपत्ति भावुक हो उठे और उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े।
इस अवसर पर तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डायमंड कुमार गिलहरे एवं व्यवहार न्यायाधीश हिमांशी सर्राफ विशेष रूप से उपस्थित रहीं। न्यायाधीशों ने परिवारजनों को इस मानवीय पहल के लिए प्रोत्साहित करते हुए वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल को सामाजिक जिम्मेदारी बताया।
कार्यक्रम के दौरान नालसा की ‘वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक सेवाएं योजना 2016’ पर आधारित विधिक जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के तहत वरिष्ठ नागरिकों को प्राप्त कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई।
इस दौरान स्नेह सम्बल वृद्धाश्रम तिलसिवा की अधीक्षिका श्रीमती पायल गुप्ता, आश्रम स्टाफ, अन्य वरिष्ठजन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरा लीगल वालंटियर तीजेश्वरी राजवाड़े, उमेश कुमार एवं सत्य नारायण उपस्थित रहे।


