सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
प्रतापपुर, 3 फरवरी। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय प्रतापपुर में सामने आए अमानवीय हालात ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदिवासी छात्राओं द्वारा सडक़ पर उतरकर चक्काजाम किए जाने के बाद प्रशासन ने अधीक्षिका को हटाने की कार्रवाई तो की, लेकिन बीईओ और बीआरसी की भूमिका पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने से मामला और तूल पकड़ता जा रहा है।
कलेक्टर के निर्देश पर छात्रावास अधीक्षिका को तत्काल हटाते हुए निलंबन की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह सिर्फ एक कर्मचारी की गलती नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर निगरानी तंत्र का परिणाम है।
सोमवार को कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने कस्तूरबा छात्रावास पहुंचकर बच्चियों से मिलने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। इससे एक दिन पहले दर्जनों छात्राएं अव्यवस्था, खराब भोजन और प्रताडऩा के विरोध में सडक़ पर उतर आई थीं और करीब तीन घंटे तक मुख्य मार्ग जाम रहा।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि छात्रावास में स्वच्छता की भारी कमी है, खराब भोजन परोसा जाता है और शिकायत करने पर मानसिक व शारीरिक प्रताडऩा दी जाती है।
पूर्व अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने अधिकारियों की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए बीईओ और बीआरसी पर भी कार्रवाई की मांग की है। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।


