सूरजपुर

लेबर कोड से कोयला उद्योग में बड़ा बदलाव, बदलेंगे पदनाम
01-Feb-2026 8:53 PM
लेबर कोड से कोयला उद्योग में बड़ा बदलाव, बदलेंगे पदनाम

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

सूरजपुर, 1 फरवरी। देश में लागू किए जा रहे नए लेबर कोड के तहत कोयला उद्योग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं। खासकर व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता के प्रभाव से न सिर्फ पदनामों में बदलाव होगा, बल्कि यूनियनों, समितियों और सुरक्षा तंत्र की भूमिका को लेकर भी नई बहस छिड़ गई है।

 सूत्रों के अनुसार लेबर कोड लागू होने के बाद ओवर मैन अब माइनिंग सुपरवाइजर कहलाएंगे, वहीं माइनिंग सरदार का पदनाम बदलकर असिस्टेंट माइनिंग सुपरवाइजर कर दिया जाएगा। यह बदलाव देशभर के कोयला क्षेत्रों सहित कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों में प्रभावी होने की संभावना है।

बताया जा रहा है कि लंबे समय से डिग्रीधारी ओवरमैन की जगह माइनिंग इंजीनियर और डिप्लोमाधारी माइनिंग ऑफिसर, जबकि माइनिंग सरदारों के लिए माइनिंग असिस्टेंट या माइनिंग इंस्ट्रक्टर जैसे पदनामों की मांग उठती रही है। लेकिन नए लेबर कोड के तहत सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब ओवरमैन को माइनिंग सुपरवाइजर और माइनिंग सरदार को असिस्टेंट माइनिंग सुपरवाइजर के रूप में ही जाना जाएगा। इस निर्णय को लेकर कोयला कर्मियों के बीच असंतोष भी देखा जा रहा है। कई कर्मचारी इसे पद और प्रतिष्ठा में कटौती के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा और जवाबदेही तय करने के लिए किया जा रहा है।

लेबर कोड के संभावित प्रभावों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यूनियनों के भविष्य को लेकर उठ रहा है। कोयला उद्योग में अब तक जेबीसीसीआई, एपेक्स जेसीसी, मानकीकरण समिति, वेलफेयर बोर्ड और सेफ्टी बोर्ड जैसी संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। लेकिन नए कानून के बाद इनका स्वरूप और अधिकार क्षेत्र क्या होगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

 नए लेबर कोड के तहत प्रत्येक इकाई में सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य होगा। इस समिति में कुल 20 सदस्य होंगे, जिसमें 10 सदस्य प्रबंधन पक्ष से और 10 सदस्य कामगार पक्ष से होंगे। कामगार प्रतिनिधियों का चयन एकल यूनियन या वार्ताकार परिषद में शामिल यूनियनों द्वारा नामांकन के माध्यम से किया जाएगा।

यदि किसी इकाई में एकल यूनियन या वार्ताकार परिषद मौजूद नहीं होगी, तो सेफ्टी बोर्ड के सदस्यों का चुनाव कराया जाएगा।

 कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को पदनाम बदलने के साथ-साथ वेतन, पदोन्नति, जिम्मेदारी और अधिकारों को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या असंतोष न फैले। फिलहाल यह तय माना जा रहा है कि लेबर कोड लागू होते ही कोयला उद्योग का चेहरा बदलेगा।


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