सूरजपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सूरजपुर, 4 जनवरी। छत्तीसगढ़ के पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर राज्य में वर्ष 2025-26 के लिए प्रचलन में लाई गई एफ.आर.के. टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया है कि टेंडर की शर्तों में अचानक किए गए बदलाव से राज्य के अधिकांश स्थानीय एफआरके फोर्टिफाइड राइस निर्माता टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।
पूर्व मंत्री ने उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ राज्य मार्कफेड द्वारा 19 दिसंबर 2025 को जारी आरएफपी के तहत प्रदेश के लगभग नब्बे प्रतिशत एफआरके निर्माता/मिलर्स पात्र थे। किंतु मात्र एक सप्ताह के भीतर 26 दिसंबर 2025 को जारी कोरिएंडम के बाद पात्रता शर्तों में ऐसा परिवर्तन किया गया, जिससे अब केवल लगभग 20 प्रतिशत स्थानीय मिलर्स ही पात्र रह गए हैं, जबकि बाहरी राज्यों के निर्माताओं को लाभ की स्थिति में ला दिया गया है। इससे प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत एफआरके प्लांट टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।
श्री भगत ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा लगातार नए उद्योगों, एमएसएमई इकाइयों और खाद्य फोर्टिफिकेशन क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन वर्तमान टेंडर शर्तें इन नीतियों के विपरीत प्रतीत होती हैं। उन्होंने इसे स्थानीय और नए उद्यमियों के लिए नुकसानदायक बताया।
पूर्व मंत्री ने पत्र में यह भी चेतावनी दी कि पात्रता सीमित किए जाने से एफआरके की दरों में भारी वृद्धि हो सकती है। जो राज्य के राजस्व हितों के प्रतिकूल है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि एफआरके की आपूर्ति कुछ सीमित संस्थाओं के हाथों केंद्रित होती है, तो भविष्य में आपूर्ति बाधित होने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसका सीधा असर राइस मिलर्स पर पड़ेगा, जिससे चावल का समय पर जमा होना प्रभावित होगा और अंतत: सार्वजनिक वितरण प्रणाली की आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हो सकती है।
अमरजीत भगत ने पत्र में यह भी कहा कि वर्तमान प्रक्रिया से नए और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के साथ भेदभाव होता प्रतीत होता है, जबकि कुछ चुनिंदा और पहले से स्थापित पक्षों को अनुचित लाभ मिलता है। यह स्थिति सरकारी टेंडर प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों — निष्पक्षता, पारदर्शिता और समान अवसर — के अनुरूप नहीं है।
अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री से जनहित, राज्यहित और शासन के वित्तीय हितों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025-26 की एफआरके टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर, सभी हितधारकों से समुचित परामर्श के बाद संशोधित, व्यावहारिक और पारदर्शी शर्तों के साथ पुन: टेंडर जारी करने का आग्रह किया है।


