सूरजपुर

उत्साह से मना छेरछेरा, गांव-गांव में लोकगीतों की गूंज
04-Jan-2026 11:02 PM
उत्साह से मना छेरछेरा, गांव-गांव में लोकगीतों की गूंज

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सूरजपुर, 4 जनवरी।
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक लोकपर्व छेरछेरा पूरे अंचल में श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में इस पर्व की रौनक देखते ही बन रही है। गांव-गांव, गली-गली में लोकगीतों की गूंज, बच्चों की किलकारियां और दान-पुण्य की भावना ने वातावरण को पूरी तरह लोकमय बना दिया है।
सुबह होते ही गांवों की गलियों में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की टोलियां निकलकर छेरता मांगते दिखाई दिए। हाथों में टोकरी और झोली लिए लोग घर-घर पहुंचकर पारंपरिक स्वर में छेर-छेरा, छेर-छेरा की पुकार लगाते नजर आए। इस पुकार के साथ ही हर घर के आंगन में खुशी की लहर दौड़ रही है। लोग श्रद्धा भाव से चावल, दाल, अनाज, सब्जी और दान सामग्री प्रदान करते दिखाई दे रहे हैं। छेरछेरा पर्व का गहरा सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह पर्व दान, त्याग, करुणा और सामूहिकता का संदेश देता है।
 मान्यता है कि इस दिन अन्न दान करने से घर में अन्न भंडार कभी खाली नहीं रहता और आने वाला वर्ष सुख-समृद्धि से भरपूर होता है। यही कारण है कि ग्रामीणजन पूरे मन से इस परंपरा का निर्वहन करते हैं और इसे अपनी नई पीढ़ी को भी सिखा रहे हैं।
पर्व के दौरान महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी नजर आईं, वहीं बच्चों में इस पर्व को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। कई गांवों में बच्चों ने लोकगीतों के साथ छोटे-छोटे नाट्य रूप प्रस्तुत कर छेरछेरा की परंपरा को जीवंत किया।
ग्रामीणों का कहना है कि छेरछेरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा है, जो समाज को जोडऩे, बराबरी और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का काम करता है। यह पर्व अमीर-गरीब के भेद को मिटाकर सभी को एक सूत्र में बांधता है।  छेरछेरा पर्व के अवसर पर गांवों में विशेष पकवान भी बनाए गए। कई घरों में सामूहिक भोज का आयोजन हुआ, जहां लोग एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देते नजर आए।
पूरे क्षेत्र में उल्लास, आस्था और लोकसंस्कृति की सुगंध फैली हुई है।


अन्य पोस्ट