राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : राजस्थान जैसा कुछ मुमकिन नहीं
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : राजस्थान जैसा कुछ मुमकिन नहीं
14-Jul-2020 6:26 PM

राजस्थान जैसा कुछ मुमकिन नहीं

राजस्थान की तरह छत्तीसगढ़ के राजनीतिक माहौल में खदबदाहट पैदा करने की कोशिश हो रही है। वैसे तो कांग्रेस विधायकों की संख्या इतनी ज्यादा है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान की तरह की स्थिति पैदा हो पाना असंभव है। इसकी एक वजह यह भी है कि विपक्ष बेहद कमजोर हो चुका है। किसी तरह की कोशिश पर विपक्ष के ही टूटने का ही खतरा ज्यादा है। ईडी-इनकम टैक्स की कुछ कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन ये भी ज्यादा मारक साबित नहीं हो पाई।

सुनते हैं कि सरकार में बैठे प्रमुख लोगों को अब कुछ कानूनी झमेलों का सामना करना पड़ सकता है। इन लोगों के खिलाफ चल रहे पुराने प्रकरणों की मॉनिटरिंग राज्य भाजपा के शीर्ष नेता कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के नामी वकीलों से संपर्क बनाए हुए हैं। पिछले दिनों इस सिलसिले में मौलश्री विहार के एक बंगले में बैठक भी हुई थी। चर्चा का निचोड़ यह रहा है कि अगले कुछ दिनों में अदालती प्रकरण के चलते सरकार में बैठे लोगों के लिए उलझनें पैदा हो सकती हैं । देखना है कि आगे-आगे होता है क्या?

डिजिटल खाई खुद गयी...

कोरोना की वजह से स्कूल-कॉलेज तो बंद हैं , लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग की पहल पर वर्चुअल क्लास चल रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने बकायदा एप भी तैयार किया है, जिससे विद्यार्थी पाठ्यक्रम सामग्री डाउनलोड कर सकते हैं। निजी स्कूलों में तो क्लास ठीक ठाक चल रही है, मगर सरकारी स्कूलों का बुरा हाल है।

शहर के बाहरी इलाके के एक सरकारी स्कूल के क्लास टीचर के पास एक छात्र का फोन आया। उसने गुजारिश की कि क्लास रात में ही लिया करें, क्योंकि दिन में मोबाइल पिताजी लेकर चले जाते हैं। ऐसे में दिन में क्लास में शामिल हो पाना संभव नहीं है। इसी तरह एक अन्य छात्र से टीचर ने वर्चुअल क्लॉस अटेंड नहीं करने का कारण पूछा, तो उसने कह दिया कि मोबाइल में बैलेंस खत्म हो गया है और आप नेट पैक डलवाएंगी, तभी क्लॉस अटेंड कर पाऊंगा। अब शहर के स्कूलों का यह हाल है, तो दूर दराज के इलाकों में वर्चुअल क्लॉस का क्या हाल होगा, यह अंदाजा लगाया जा सकता है।

देश भर के जानकारों का कहना है कि संपन्न और विपन्न बच्चों के बीच यह एक नई डिजिटल खाई खुद गयी है...

कौन किसकी सिफारिश पर...

संसदीय सचिवों की नियुक्ति में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव की पसंद को भी खास महत्व दिया गया है। महंत कैंप की विधायक रश्मि सिंह, यूडी मिंज, द्वारिकाधीश यादव और शिशुपाल सोरी को संसदीय सचिव बनाया गया, तो टीएस की सिफारिश पर पारस राजवाड़े, अंबिका सिंहदेव, चिंतामणी महाराज को संसदीय सचिव का पद नवाजा गया।

विकास उपाध्याय का नाम सीएम और टीएस, दोनों ही कैंप से था। ताम्रध्वज साहू और रविन्द्र चौबे की सिफारिश से पहली बार विधायक बने गुरूदयाल सिंह बंजारे को संसदीय पद दिया गया। बाकी विनोद सेवनलाल चंद्राकर, इंदरशाह मंडावी, कुंवर सिंह निषाद, रेखचंद जैन, चंद्रदेव राय और शकुंतला साहू सीएम की पसंद थे। कुल मिलाकर इन नियुक्तियों में किसी तरह मतभेद की स्थिति नहीं रही।

हर डाल में उल्लू बैठा है, अंजाम गुलिस्तां क्या होगा?

उपर लिखी यह लोकोक्ती सरकार के दोबारा राज्य के भी चेकपोस्ट को चालू किए जाने पर बिल्कुल फीट बैठ रहा है। दरअसल राज्य को सर्वाधिक राजस्व देने वाले चेकपोस्ट पाटेकोहरा बेरियर के खुलने से पहले ही राजनेताओं, अफसरों और दूसरे प्रभावी लोग अपने पसंदीदों को चेकपोस्ट मेें काम दिलाने के लिए दिन-रात विभागीय मंत्री समेत परिवहन अफसरों के दहलीज पर चक्कर लगा रहे हैं। बेरियर खुलने के लिए सरकार की घोषणा पर अभी अमल हुआ नहीं कि पाटेकोहरा बेरियर से जुड़े कई तरह के कामों को करने की ख्वाहिश लोग पाल बैठे हैं। सुनते हैं कि विभागीय मंत्री मो. अकबर के राजनांदगांव के प्रभारी मंत्री होने की वजह से भी उनके दफ्तर में आवेदनों का अंबार लग गया है। जबकि वह कई बार कह चुके हैं कि सरकार की ओर से अभी बेरियर खोलने की प्रारंभिक तैयारी मात्र है। यह कह सकते हैं कि बस्ती अभी बसी नहीं है और लोगों ने अपना गुलिस्तां तैयार कर लिया है। प्रशासनिक और राजनीतिक जगत में पाटेकोहरा बेरियर पर सबकी नजरें जमी हुई है। इस बेरियर के इर्द-गिर्द प्रशासनिक अमला अपनी तैनाती की कोशिश में है। राजनेताओं और पुलिस महकमे के अफसरों ने बेरियर में पोस्टिंग के लिए ऐडी-चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। यह बेरियर कमाई के मामले में सबकी प्राथमिकता में है।

भाजपा के दिन-बादर खराब

राज्य से सत्ता हाथ से चले जाने के बाद भाजपा के दिन-बादर खराब चल रहे हैं। सबसे ज्यादा झटका सत्ता गंवाने का असर राजनांदगांव के नेताओं को लगा है। पिछले सप्ताह एक भाजपा नेत्री के साथ कथित मारपीट का मामला प्रदेश में सुर्खियों में रहा। भाजपा के जिलाध्यक्ष के साथ विवाद के बाद महिला नेत्री को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब चर्चा है कि आपसी खींचतान में फंसी पार्टी के कुछ नेता उक्त महिला को दोबारा संगठन में वापस लेने के लिए राज्यभर के नेताओं और संगठन प्रमुखों से मिल रहे हैं।

राजनांदगांव की दूसरी पंक्ति के नेताओं ने अघोषित रूप से अभियान छेड़ते हुए जिलाध्यक्ष की कार्रवाई पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं। भाजपा से जुड़ा एक वाक्या चिटफंड कंपनी का है। खैरागढ़ पुलिस ने लाखों रुपए की हेराफेरी के मामले में मंडल अध्यक्ष को मुख्य आरोपी बनाकर जेल में भीतरा दिया। वहीं पुलिस की इस कार्रवाई के दो दिन पहले निगम के एक पूर्व नेता ने भाजपा के वाट्सअप ग्रुप में अश्लील वीडियो अपलोड कर दिया। अपलोड किए गए वीडियो को उक्त नेता लाख कोशिश के बावजूद डिलीट नहीं कर पाया, क्योंकि वह तकनीकी रूप से मोबाइल चलाने का जानकार नहीं है। गुजरा पखवाड़ा राजनांदगांव के भाजपा नेताओं के लिए सार्वजनिक रूप से विवादों से भरा रहा।

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