राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : आरटीआई कार्यकर्ता से परहेज?
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : आरटीआई कार्यकर्ता से परहेज?
09-Jul-2020 5:42 PM

आरटीआई कार्यकर्ता से परहेज?

खबर है कि निगम-मंडलों के लिए नाम तो तय हो गए हंै, लेकिन कुछ दिग्गज अपने करीबियों को मलाईदार पद दिलाने के लिए काफी मशक्कत कर रहे हैं। चर्चा है कि सभी मंत्रियों नेे एक-एक नाम दिए हैं। जिन पर सहमति बन चुकी है। हालांकि यह एक और बात है कि पहली किस्त में हर मंत्री की पसंद को शायद जगह न मिल पाए। 

कुछ नामों को लेकर जरूर विवाद की स्थिति है। ये लोग पार्टी के प्राथमिक सदस्य नहीं हैं, लेकिन सामाजिक या फिर आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में पिछली सरकार के प्रभावशाली लोगों के खिलाफ मोर्चा खोला था। इससे कांग्रेस को काफी फायदा पहुंचा। अब ऐसे एक-दो लोगों को पद देने की बात आई है, तो पार्टी के कुछ अन्य दिग्गज नेता इसका विरोध कर रहे हैं। सरकार के कुछ लोगों का मानना है कि सूचना का अधिकार दोहरी तलवार होता है... 

संसदीय सचिवों को लेकर जो फार्मूला बना है, उसमें क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को ध्यान में रखा गया है। यह भी सोचा गया है कि चूंकि कांग्रेस 9 संसदीय सीटों पर लोकसभा चुनाव हारी हुई है, और उन जगहों पर भाजपा के सांसद हैं, इसलिए वहां पार्टी का असर बनाने के लिए उन संसदीय सीटों से एक-एक विधायक को संसदीय सचिव बनाया जाए। इसमें शायद दुर्ग से कोई संसदीय सचिव न बनाया जाए क्योंकि वहां से मंत्री बहुत हैं। 

पिछली सरकार में रायपुर से बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत मंत्री थे। इस सरकार में रायपुर की सीटों के विधायकों का मंत्री बनना तो मुश्किल है। अलबत्ता कुलदीप जुनेजा और विकास उपाध्याय को संसदीय सचिव बनने का मौका मिल सकता है। एक चर्चा यह भी है कि पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू को अपैक्स बैंक का चेयरमैन बनाया जा सकता है। पहले धनेन्द्र पद लेने के लिए तैयार नहीं थे। कुछ सूत्रों के मुताबिक वे अब पद के लिए तैयार हो गए हैं। 

मरवाही में सबकी साख दांव पर

बिना शोरगुल के भाजपा मरवाही उपचुनाव की तैयारी कर रही है। पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल को चुनाव की कमान सौंपी गई है। खास बात यह है कि अमर को रमन सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री पद पर रहते कोटा उपचुनाव की कमान सौंपी गई थी। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी रेणु जोगी के हाथों भाजपा प्रत्याशी को बुरी हार का सामना करना पड़ा। कोटा में हार के बाद अमर पर आरोप लगा था कि उन्होंने चुनाव संचालन सही ढंग से नहीं किया। ऐसा माना जा रहा था कि बिलासपुर शहर में जोगी की नाराजगी न झेलने के लिए अमर अग्रवाल ने रेणु जोगी के खिलाफ चुनाव ढीलाढाला लड़ा था। इस बात ने जोर इतना पकड़ लिया था कि बाद में एक उपचुनाव की तैयारी बैठक मुख्यमंत्री निवास में चल रही थी। वहां अमर अग्रवाल को उपचुनाव का जिम्मा देने की बात उठी तो वे भड़क उठे। उन्होंने कहा कि उन पर रेणु जोगी की मदद का आरोप लग रहा है, और ऐसे में वे किसी उपचुनाव का काम नहीं देखेंगे। इस पर आमतौर पर शांत रहने वाले रमन सिंह ने कहा कि मंत्री हैं तो पार्टी का दिया हुआ काम तो करना ही पड़ेगा। इस पर अमर अग्रवाल ने तैश में आकर कहा कि अगर ऐसी बात है तो वे मंत्री पद छोड़ देंगे। वे गुस्से में उठकर सीएम हाऊस से चले गए, घर जाकर इस्तीफा लिखा, मुख्यमंत्री को भेजा, और मोबाइल फोन बंद करके कार से बिलासपुर निकल गए। इस्तीफा मंजूर हो गया, और फिर उन्हें कैबिनेट में लौटने में लंबी मेहनत और लंबा वक्त लगा। 

खैर, अब खुद चुनाव हार चुके अमर अग्रवाल मरवाही में पार्टी उम्मीदवार को जिताने के लिए अभी से रणनीति बना रहे हैं। अमर का चुनाव का प्रबंधन काफी बेहतर माना जाता है। अमर के मार्गदर्शन में मरवाही से टिकट के दावेदार रामदयाल उइके, अर्चना पोर्ते और समीरा पैंकरा मेहनत करते दिख रहे हैं। मरवाही उपचुनाव में पार्टी के साथ-साथ अमर की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा भी दांव पर है।  अब दांव पर तो जोगी परिवार की साख भी लगी है क्योंकि वहां से विधायक अजीत जोगी ही थे। और कांग्रेस की भी साख दांव पर लगी है क्योंकि जोगी परिवार से यह सीट जीतना उसके लिए भी जरूरी है। 

इस बीच अफवाहों के बाजार को देखें तो अजीत जोगी के जीते जी ही जोगी परिवार की कांग्रेस में वापिसी की कोशिशों की चर्चा हवा में रहती थी, और अब भी अगर ऐसी चर्चाएं छिड़ेंगी, तो कोई हैरानी नहीं होगी। 

दिल्ली से लौटकर होम-आइसोलेशन 

राज्य के दो आईएएस अफसर डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा होम आइसोलेशन में हैं। नान प्रकरण में दोनों ही अफसरों से पिछले दिनों ईडी ने अपने दिल्ली ऑफिस में पूछताछ की है। चूंकि दिल्ली रेड जोन में है। ऐसे में डॉ. शुक्ला ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए रायपुर में ही पूछताछ के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, मगर उन्हें राहत नहीं मिल पाई। खास बात यह है कि दिल्ली के ईडी ऑफिस के लोग भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। दो बार तो दफ्तर बंद भी करना पड़ा। बावजूद इसके दोनों अफसरों से दो दिन तक पूछताछ की गई। अब जब वे लौटे हैं, तो स्वाभाविक तौर पर उन्हें सतर्कता बरतते हुए आइसोलेशन में रहना ही था। 

 

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