राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : रैबीज टीके के बावजूद मौत!
29-Jan-2026 6:43 PM
राजपथ-जनपथ : रैबीज टीके के बावजूद मौत!

रैबीज टीके के बावजूद मौत!

सरगुजा जिले के दरिमा इलाके में 65 साल के एक बुजुर्ग की कुत्ते के काटने से मौत हो गई। एक आवारा कुत्ते ने उस पर बीते साल के अंतिम दिन 31 दिसंबर को तब हमला कर दिया था, जब वे सुबह घर से बाहर घूमने के लिए निकले थे।  परिवार वाले उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने घाव साफ किए और एंटी-रेबीज वैक्सीन की तीन डोज दीं। लेकिन 26 जनवरी को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। इलाज के दौरान बुधवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों का कहना है कि रेबीज जैसे लक्षण दिख रहे थे, लेकिन पूरी जांच से ही साफ होगा कि मौत का असली कारण क्या था।

इस मामले में गौर करने की बात यह है कि पीडि़त को निर्धारित 24 घंटे के भीतर इंजेक्शन का पहला डोज दे दिया गया था। इसके बाद के अंतराल में दिए जाने वाले इंजेक्शन भी दिए जा रहे थे। एक डोज बचा हुआ था। सवाल यह है कि क्या रेबीज के इंजेक्शन भी काम करना बंद कर रहे हैं। या फिर पीडि़त में इम्युनिटी पॉवर कम थी। फिलहाल बिसरा को सुरक्षित रखा गया है, जिसकी जांच के बाद पता चल सकेगा कि रेबीज के चलते मौत हुई, या फिर कोई दूसरी बीमारी मौत की वजह थी।

बाकी छत्तीसगढ़ की तरह सरगुजा जिले में भी डॉग बाइट के मामले बढ़े हैं। पिछले साल 2025 में 4600 से अधिक लोगों को कुत्तों ने काटा। ये वे मामले हैं, जो अस्पताल में पहुंचे। शहर से लेकर गांव तक, सडक़ों पर, बाजारों में और घरों के आसपास आवारा कुत्तों के झुंड घूमते नजर आते हैं यह संकट इतना गहरा है कि अब रेबीज का डर हर घर में बैठ गया है। दरिमा में हुई मौत ने यह साफ कर दिया कि टीके लगने के बावजूद अगर इलाज में कोई चूक हो या वायरस ज्यादा तेज हो, तो जान बचाना मुश्किल हो जाता है।

दरिमा जो सरगुजा जिला मुख्यालय अंबिकापुर के बाहरी इलाके का ही हिस्सा है, वहां कचरा प्रबंधन बाकी शहरों के मुकाबले अच्छा है। कुत्ते उन इलाकों में ज्यादा आक्रामक पाए जाते हैं जहां उन्हें अपने भोजन के लिए ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है। हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर कुत्तों पर नजर रखने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डाल दी है, जिसका विरोध भी हुआ। व्यवहार में इसका कोई नतीजा नहीं निकलना है- नहीं निकल रहा है। नगरीय निकायों को शेल्टर बनाना है, कुत्तों को नसबंदी का इंजेक्शन लगवाना है, मगर जिस तादात में आवारा कुत्तों की आबादी बढ़ी है। वह हर गली सडक़ में मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कुछ शहरी इलाकों में डॉग फीडिंग एरिया के साइन बोर्ड लगे हुए दिखते हैं, पर वहां न तो डॉग दिखाई देते हैं और न ही फीडिंग कराने वाले लोग। इससे पता चलता है कि किसी अदालत के निर्देश के चलते इस समस्या को हल होते नहीं पाया जा सकता।

कैंपस, मूर्तियां, और अहाते

करीब दो दशक बाद अपने पढ़े पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय गए एक पूर्व छात्र ने परिसर को देख अपना पूर्व और एक दिन का अनुभव कुछ यूं लिखा विश्वविद्यालय एक है—पर देखने में लगता है जैसे मूर्ति नगर योजना के तहत विकसित हुआ हो।

कैंपस इतना बड़ा है कि बाहर से देखो तो विश्वविद्यालय,और अंदर घुसो तो लगे —अरे, यह तो गली नंबर 4, विभाग नंबर 7 है! हर विभाग ने पहले ऊँची-ऊँची बाउंड्रीवाल खड़ी की, ताकि ज्ञान कहीं भाग न जाए और पड़ोसी विभाग का विचार भीतर न घुस पाए। पहले पहचान थी — स्वामी विवेकानंद की मूर्ति जिसे आइकन कहा जाता था। फिर लगा —इतना ज्ञान काफी नहीं है,  तो रविशंकर शुक्ल की आदमकद मूर्ति आ गई। अब खेल मैदान में महात्मा गांधी भी विराजमान हैं,

शायद सोच रहे होंगे — मैं अहिंसा सिखाने आया था, यहाँ तो हर विभाग अपनी-अपनी सीमा पर लाठी टेककर खड़ा है। हर विभाग अपनी श्रद्धा अनुसार मूर्ति लगा रहा है —कहीं प्रेरणा, कहीं इतिहास, तो कहीं शायद अनुदान की फाइल पास होने की आस।

अब हालत यह है कि छात्र पढ़ाई कम करता है, और रास्ता पूछता है ज्यादा — भैया, गांधी जी वाली मूर्ति के बाद दाएं मुड़ें या शुक्ल जी के पास से सीधा जाएँ?

अगर यही रफ्तार रही तो भविष्य में प्रवेश पत्र पर लिखा होगा — मूर्ति संख्या 12 के पास रिपोर्ट करें। विश्वविद्यालय एक है, पर आत्मा कई हिस्सों में बँटी हुई —और हर हिस्से पर तख्ती लगी है, यह मेरा क्षेत्र है। वहां से वह यह सोचकर रवाना हुए कि भविष्य में आऊं तो कुछ और मूर्तियां लगी मिलेंगी।

कोयला एकदम से सहम गया!

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला खदान केस में सभी प्रमुख आरोपियों को नियमित जमानत दे दी है। इनमें निलंबित आईएएस रानू साहू, समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी हैं। ये सभी को अंतरिम जमानत पर थे। सौम्या शराब घोटाला केस में जेल में हैं। इस केस में उन्हें जमानत नहीं मिल पाई है।

सभी आरोपियों को सशर्त जमानत मिली थी, कि उन्हें प्रदेश से बाहर रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसमें कोई राहत नहीं दी है। सौम्या, बैंगलुरू में रहती थीं। निलंबित आईएएस रानू साहू भोपाल शिफ्ट हो चुकी हैं। समीर विश्नोई जबलपुर में निवासरत हैं। जबकि कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी दिल्ली में रहता है। सभी को पेशी में जिला अदालत में हाजिर होने के लिए रायपुर आने की अनुमति है।

मेरे सैंया भये कोतवाल, अब डर काहे का

छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल हिंसा खत्म करने के लिए प्रशासन और सुरक्षा बलों के जवान ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। मगर, कभी झारखंड का पलामू जिला भी ऐसा ही था। वहां के थानों में बंकर बने होते थे। मगर, आज का माहौल देखिये। इस जिले के हुसैनाबाद पुलिस स्टेशन में 26 जनवरी पर न केवल शान से तिरंगा फहराया गया, बल्कि उसके बाद पत्नी की फरमाइश पर थानेदार ने मशहूर फिल्मी गीत मेरे सैंया भये कोतवाल पर डांस करते हुए रील्स बनाई। रील्स बनाने के दौरान उन्होंने अपनी टोपी भी देवी जी के सर पर रख दिया। रील इंस्टाग्राम पर डाल दी गई। आगे चलकर क्या हुआ? यह रील थानेदार के ऊपर के अफसरों तक पहुंचकर फाइल बन गई। एसपी साहब ने थानेदार को बुलाकर फटकार लगाई है। उसे शो कॉज नोटिस जारी हुआ है, उसके खिलाफ जांच बिठा दी गई है।


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