राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : जी-राम-जी भी आजमा कर देख लें...
27-Jan-2026 5:55 PM
राजपथ-जनपथ : जी-राम-जी भी आजमा कर देख लें...

जी-राम-जी भी आजमा कर देख लें...

छत्तीसगढ़ में रोजगार सहायक मनरेगा योजना की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। मजदूरों के जॉब और वेतन भुगतान का लेखा-जोखा उनके पास होता है। मगर उनका वेतन बहुत कम है। मई 2022 में राज्य सरकार ने उनका मानदेय 6,000 रुपये से बढ़ाकर 9,540 रुपये किया, जो कलेक्टर दर के अनुरूप था। फिर भी, रोजगार सहायक संघ नियमितीकरण, सम्मानजनक वेतन वृद्धि, पंचायत सचिव के समकक्ष ग्रेड पे और सेवा समाप्ति पर रोक की मांग करता रहा है। ये मांगें जायज हो सकती है। इतने कम मानदेय में परिवार चलाना और दैनिक खर्चों का बोझ उठाना मुश्किल होता है। 

दूसरी ओर, कोरिया जिले की हालिया घटना बताती है कि इनमें से बहुत लोगों की ऊपरी कमाई ठीक-ठाक होगी। सोनहत जनपद पंचायत के रोजगार सहायक जिंदर सोनवानी को एक सरकारी स्कूल के खेल मैदान में आयोजित फुटबॉल टूर्नामेंट के समापन समारोह में अश्लील डांस परफॉर्मेंस के दौरान नोट उड़ाते हुए पकड़ा गया। वीडियो सामने आने पर उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। नोट लुटाने के दौरान उसने यह भी नहीं सोचा कि वह कोई स्थायी सरकारी कर्मचारी नहीं है, संविदा पर है- जिसे बाहर कर देने के लिए बड़ी जांच जरूरी नहीं है। यह भी नहीं सोचा कि उनके जैसे हजारों रोजगार सहायक कम वेतन मिलने के कारण सरकार के सामने फरियाद लगा रहे हैं।

इधर, मनरेगा को केंद्र से नियंत्रित करने, निगरानी बढ़ाने और नाम बदलकर जी-राम-जी करने के फैसले की तीखी आलोचना हो रही है। कहा जा रहा है कि इससे योजना की विकेंद्रीकरण की भावना प्रभावित होगी और गरीबों का रोजगार छिन सकता है। मगर, यह भी देखें कि मनरेगा में अभी कितने घोटाले हो रहे हैं कि रोजगार सहायकों तक उड़ाने लायक पैसे पहुंच रहे हैं। क्या पता जी-राम-जी इसमें कुछ सुधार लाए और गड़बड़ी रुक जाए या कम हो जाए।

सेक्स चर्चा जारी रहेगी

चर्चित सेक्स सीडी कांड में सेशन कोर्ट ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल को बरी करने के लोअर कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है। भूपेश पर बाकी आरोपियों के साथ मुकदमा चलेगा। हालांकि पूर्व सीएम, सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जा रहे हैं। मगर अब कुछ परिस्थितियां बदल गई है।

मसलन, सेक्स सीडी कांड के प्रमुख गवाहों में से एक विकास तिवारी का सीबीआई को दिए गए बयान से पूर्व सीएम भूपेश बघेल को बड़ी राहत मिली थी, और फिर बाद में लोअर कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। इससे परे  कुछ दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी को पार्टी ने निकाल दिया। विकास ने झीरम कांड में भाजपा और कांग्रेस नेताओं का नार्को टेस्ट की मांग रखी थी।

विकास तिवारी, पहले पूर्व सीएम के करीबी माने जाते रहे हैं। बाद में पूर्व सीएम के खेमे से अलग हो गए। चर्चा है कि विकास के कांग्रेस से निष्कासन में पूर्व सीएम की भूमिका रही है। अब सेक्स सीडी कांड पर सुनवाई होनी है। हल्ला है कि विकास तिवारी, इस पूरे प्रकरण पर इंटरविनर बन सकते हैं, और वो इस सिलसिले में जल्द ही कोर्ट में आवेदन दे सकते हैं। इस पूरे मामले में विनोद वर्मा, विजय भाटिया, और कैलाश मुरारका भी आरोपी हैं। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में सेक्स सीडी कांड पर अदालती सुनवाई पर राजनीतिक दलों की नजरें रहेंगी।

अमरावती ऐसी पहली राजधानी

आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती देश के किसी राज्य की ऐसी पहली राजधानी होने जा रही है जिसके गठन या घोषित करने संसद में प्रस्ताव पारित होने जा रहा है। इसके बाद भविष्य में किसी भी दल की सरकार आए राजधानी को बदल नहीं पाएगी। अब तक राज्यों के गठन के वक्त राज्य और उसकी राजधानी का नाम तय कर संसद से ही पारित होते रहे हैं। जैसे छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, झारखंड की रांची, उत्तराखंड की देहरादून बना।

आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर गठन काल से ही विभाजन के समय सीएम रहे चंद्रबाबू नायडू और विपक्ष के नेता जगनमोहन रेड्डी के बीच अमरावती पर तू-तू, मैं-मैं होती रही है। इनके बीच  2019 के विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा भी रहा। 19-24 में सरकार में रहते जगन ने नवंबर 21 में तीन राजधानियों की घोषणा की। इनमें अमरावती को विधायी राजधानी, विशाखापत्तनम को कार्यपालिका और करनूल को न्यायिक राजधानी बनाने का ऐलान किया। 24 के चुनाव में भी यह मुद्दा रहा और जगन का सूपड़ा साफ हो गया।

 बीते डेढ़ साल में यह मुद्दा वहां हर मंच पर हलचल बनाए हुए है। यह भी कहा जा रहा है कि भविष्य की चुनावी राजनीति में जगन के शह सवार होते ही मात खाएं नायडू से बदला लेने वह फिर से तीन राजधानियों का कांसेप्ट ला दे। इस द्वंद्व को हमेशा हमेशा के लिए खत्म करने नायडू ने नई बिसात पर काम शुरू कर दिया है। वह यह कि संसद के कल से शुरू हो रहे दो चरणों के बजट सत्र में वे एक विधेयक के जरिए अमरावती को स्थायी राजधानी घोषित करवा रहे हैं। नायडू, सार्वजनिक सभाओं में कहने भी लगे हैं कि जल्द ही अमरावती जल्द ही शाश्वत (तेलुगू भाषा में अर्थ स्थाई) राजधानी होने जा रही है। अभी केंद्र सरकार,नायडू की ताकत को कम नहीं आंक रही। सो नायडू के लिए आसान भी होगा। अब देखना है कि यह प्राइवेट मेंबर बिल होगा या गृह मंत्रालय का विधेयक।


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