राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : पीएचक्यू में हडक़म्प
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : पीएचक्यू में हडक़म्प
03-Jul-2020 6:19 PM

पीएचक्यू में हडक़म्प

राजधानी रायपुर में पुराने पीएचक्यू की एक इमारत में तीन आला अफसर बैठते हैं। डीजीपी डी.एम. अवस्थी का तो नया रायपुर में पुलिस मुख्यालय है ही, लेकिन वे शहर के लोगों से मिलने की सहूलियत में पुराने पीएचक्यू में एक दफ्तर रखे हुए हैं। इसी इमारत में नक्सल-ऑपरेशन और नक्सल-इंटेलीजेंस के एडीजी अशोक जुनेजा भी बैठते हैं, और उनका खासा बड़ा स्टाफ है। इसी बिल्डिंग में तीसरा दफ्तर पुलिस हाऊसिंग कॉर्पोरेशन का है जिसके प्रभारी एक और एडीजी पवन देव हैं। अब इस इमारत में एक साथ 9 कोरोना पॉजिटिव मिलने से इन तीनों में तो हड़बड़ी हो ही गई, कुछ दूसरे आला अफसरों में भी हड़बड़ी हो गई। एक और स्पेशल डीजी आर.के.विज भी बैठकों में नक्सल शाखा के लोगों के साथ उठते-बैठते आए हैं, और कल वे भी कोरोना जांच कराने के लिए गए। दोनों पीएचक्यू के बीच लोगों का आना-जाना लगा ही रहता है। इसी इमारत के ठीक सामने एक दूसरे इमारत इंटेलीजेंस की है जिसमें रायपुर आईजी आनंद छाबड़ा बैठते हैं। इन दोनों इमारतों में लोगों का आना-जाना लगे रहता है। अब काफी बड़ी संख्या में लोग अभी कोरोना पॉजिटिव मिले लोगों के संपर्क में आए हैं। खासकर चाय-काफी पीने-पिलाने और पानी पीने-पिलाने वाले लोग जब पॉजिटिव निकलते हैं, तो इन पीने वाले लोगों में कौन सुरक्षित हो सकते हैं?

ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि किन लोगों की शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम या अधिक होती है? सिगरेट या शराब से, या अधिक वजन और किसी बीमारी से खतरा बढ़ भी जाता है, और सब तो अपने आपको तौलने की जरूरत भी रहती है। खैर, पुराने पीएचक्यू में पौन दर्जन कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद नए पीएचक्यू में भी कल हडक़म्प रहा, और पूरी इमारत को सेनेटाइज करने का काम चलता रहा।

अब पुलिस अफसरों का काम बिना मिलेजुले तो चल नहीं सकता है, ऐसे में खतरे को एक सीमा तक ही टाला जा सकता है। जो लोग चाय-पानी के चक्कर में नहीं रहते, वे खतरे से थोड़ा सा बच भी सकते हैं। और यह बात सिर्फ पुलिस पर लागू नहीं होती है, सभी पर लागू होती है। शिष्टाचार न निभाएं तो बेहतर।

जिम बंद होने से...

प्रदेश में बहुत से अफसर और बहुत से डॉक्टर कसरत करने के बड़े शौकीन हैं। कुछ डॉक्टर तो 25-50 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं, और कई बड़े पुलिस अफसर सोशल मीडिया पर अपनी असंभव किस्म की कसरत के वीडियो पोस्ट करके दूसरों को चुनौती देते रहते हैं। इनमें से जिम में जाकर कसरत करने के शौकीन लोगों के सामने अभी थोड़ी सी दिक्कत आ गई है क्योंकि पूरे प्रदेश में जिम बंद कर दिए गए हैं। अब अगर ये अघोषित रूप से किसी जिम में जा भी रहे हों, तो कम से कम वहां के वीडियो तो पोस्ट नहीं कर सकते। ऐसे में बगीचे में घास पर की गई कसरत, या सडक़ों पर चलाई गई साइकिल की तस्वीरों से ही लोगों को सब्र करना पड़ रहा है।

कुछ बनने के पहले विरोध...

सरकार में निगम-मंडल में नियुक्तियां जल्द होने वाली है। इस पर मंथन हो चुका है। इसी बीच यह खबर उड़ी कि राजनांदगांव के एक पूर्व मेयर को निगम-मंडल में जगह दी जा सकती है। फिर क्या था पूर्व मेयर के विरोधियों के साथ-साथ पुराने नेता सक्रिय हो गए। शिकायतों का पुलिंदा हाईकमान के साथ-साथ पार्टी के रणनीतिकारों को भेजा जाने लगा। पूर्व मेयर को पद दिए जाने की चर्चाओं के पीछे की वजह भी सामने आने लगी।

सुनते हैं कि पूर्व मेयर ने दूसरे राज्य में हुए चुनाव में एक दिग्गज नेता के कहने पर काफी साधन-संसाधन झोंके थे। यहीं से पार्टी के दिग्गज नेता के साथ पूर्व मेयर का राजनीतिक रिश्ता गहरा हो गया। चूंकि निगम-मंडलों में पद बंटने हैं, ऐसे में अफवाहों के साथ-साथ शिकवा-शिकायतों का दौर चल रहा है। पार्टी 15 साल सत्ता से बाहर रही है, इस दौरान बस्तर से लेकर सरगुजा तक कई आर्थिक रूप से मजबूत नेताओं ने पार्टी के काफी कुछ किया है। मगर सिर्फ आर्थिक मजबूती को देखकर तो पद नहीं दिया जा सकता। फिलहाल सूची जारी होने से पहले ही पार्टी नेता आपस में ही टकरा रहे हैं।

आखिरकार हटाना पड़ेगा...

आखिरकार स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. एसएल आदिले  के खिलाफ ईओडब्ल्यू-एसीबी को अभियोजन स्वीकृति दे दी है।  इसके बाद ईओडब्ल्यू-एसीबी जल्द ही डॉ. आदिले के खिलाफ मेडिकल कॉलेज में भर्ती घोटाला मामले में चालान पेश कर सकती है। डॉ. आदिले पर गिरफ्तारी की तलवार अटक रही है। खास बात यह है कि कुछ माह पहले ही डॉ. आदिले को संविदा नियुक्ति दी गई थी। इसकी काफी आलोचना भी हुई। कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने तो इसकी शिकायत राज्यपाल और सीएम से भी की थी। तब स्वास्थ्य अफसरों ने दबी जुबान में यह कहा कि कोरोना फैलाव को रोकने के लिए शीर्ष अधिकारियों की कमी को देखते हुए संविदा नियुक्ति दी गई है। खैर, अब केस चलाने की अनुमति देकर गलतियों को सुधारने की कोशिश हुई है। क्योंकि चालान पेश होते ही आदिले का हटना तय माना जा रहा है।

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