राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बजाज के दिन फिरेंगे?
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : बजाज के दिन फिरेंगे?
Date : 17-Feb-2020

अमरीका दौरे पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ गए उनके सलाहकार प्रदीप शर्मा ने इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए लिखा है- कुछ मौकों पर आपको एक बाउंसर (पीछे धकेलने वाले) की तरह काम करना पड़ता है, खासकर तब जब आपके बॉस ने एक सचमुच ही शानदार भाषण दिया हो, और वे घिर गए हों, भूपेशजी ने अपने भाषण से बॉस्टन में हलचल मचा दी है।

बजाज के दिन फिरेंगे?
सालभर से निलंबन का दंश झेल रहे आईएफएस अफसर एसएस बजाज की जल्द ही बहाली हो सकती है। सीएम भूपेश बघेल अमरीका  प्रवास से लौटने के बाद बजाज की बहाली पर फैसला ले सकते हैं। नवा रायपुर के पौंता चेरिया में सोनिया गांधी ने जिस जगह पर नई राजधानी का शिलान्यास किया था, उस जमीन को पिछली सरकार ने आईआईएम संस्थान को दे दिया गया था। वर्तमान सरकार ने इसके लिए तत्कालीन सीईओ एसएस बजाज को जिम्मेदार माना था। 

वैसे तो राज्य सरकार अखिल भारतीय सेवा के अफसर को निलंबित कर सकती है, लेकिन इसके लिए केन्द्र का अनुमोदन जरूरी है। बजाज ने निलंबन के खिलाफ अपील भी की थी। केन्द्र ने बजाज का निलंबन खत्म करने की अनुशंसा की है। राज्य सरकार का रूख भी नरम है।  बजाज की साख अच्छी है। ऐसे में पूरा विभाग उनके साथ खड़ा दिख रहा है। आईएफएस एसोसिएशन पहले से ही बजाज का निलंबन खत्म करने का आग्रह कर चुका है। चूंकि निलंबन का फैसला कैबिनेट ने लिया था। ऐसे में वापसी भी सीएम की सहमति जरूरी है। माना जा रहा है कि सीएम के अमरीका लौटने के बाद बजाज की बहाली पर मुहर लग सकती है। बजाज शानदार साख वाले अफसर हैं जिसकी वन विभाग में थोड़ी सी कमी भी रहती है। वे छत्तीसगढ़ के ही रहने वाले हैं, यहीं के इंजीनियरिंग कॉलेज के पढ़े हुए हैं, इस सरकार में बाहर से बड़ी ताकत रखने वाले लोगों ने भी पिछले बरसों में बजाज का अच्छा काम देखा हुआ है, और भूपेश के कांगे्रस के भीतर के एक करीबी सहयोगी शैलेष नितिन त्रिवेदी बजाज के सहपाठी भी रहे हैं। आज जब वन विभाग को एक किस्म से सोच-समझकर भ्रष्ट बनाया जा रहा है, जब आधे डिवीजनों में गैरआईएफएस को सोच-समझकर प्रभार दिया गया, तो ऐसे माहौल में काबिल और ईमानदार अफसरों की वैसे भी कमी दिख रही है।

फरमाईशों की लिस्ट
शादी के विज्ञापन लोगों के पूर्वाग्रह भी बताते हैं, और हिन्दुस्तानी अंदाज की पसंद भी। अब इस एक विज्ञापन को देखें तो समझ आता है कि लड़कों की उम्मीदें कैसी आसमान छूती होती हैं। पांच फीट आठ इंच के एक बीडीएस डेंटिस्ट ने एक ईश्तहार दिया है। वह अभी काम भी नहीं कर रहा है, और उसकी फरमाईश कोई मूर्तिकार ही पूरी कर सकता है। उसे बहुत ही गोरी, खूबसूरत, बहुत ही निष्ठावान, बहुत ही भरोसेमंद, प्यारी, ख्याल रखने वाली, बहादुर, ताकतवर, पैसे वाली, अत्यंत ही देशप्रेमी, और भारत की फौजी क्षमता को बढ़ाने की हसरत रखने वाली, भारत की खेल क्षमता बढ़ाने वाली, शिशुपालन में विशेषज्ञ, शानदार पकाने वाली, भारतीय हिन्दू-ब्राम्हण कामकाजी लड़की चाहिए। यह लड़की झारखंड या बिहार से होनी चाहिए, संपूर्ण कुंडली मिलान, और 36 गुण मिलना जरूरी। यह सब हो तो ही इस लड़के को शादी में कोई जल्दी नहीं है, और यह सिर्फ एसएमएस पर आने वाले प्रस्ताव का जवाब देगा, फोन नहीं उठाएगा। 

अब जो डेंटिस्ट कोई कामकाज भी नहीं कर रहा है, उसकी फरमाईशों की लिस्ट इतनी लंबी है कि उसे कोई मूर्तिकार या कोई ईश्वर ही पूरा कर सकते हैं, और इतने हुनर, इतनी खूबसूरती एक बदन में फिट कर सकते हैं। 

नंबर प्लेट 
लोगों को अपनी ताकत और अपना खास दर्जा दिखाने के लिए गाडिय़ों के आगे-पीछे का इस्तेमाल करते हैं। राजनीति से जुड़े हुए कुछ लोग गाडिय़ों के ऊपर तरह-तरह की लाईट लगा लेते हैं, सायरन और लाऊडस्पीकर लगा लेते हैं, ताकि चौराहे पर खड़े सिपाही दहशत में आ जाएं। राजनेताओं की गाडिय़ों में सायरन एक आम बात हो गई है, और वह सड़क पर आतंक फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। नंबर प्लेट की जगह किसी धार्मिक या सामाजिक संस्था का नाम, किसी साम्प्रदायिक संगठन का नाम, या किसी पार्टी के चुनाव चिन्ह को लगा लेना एक आम बात है। पुलिस भी आमतौर पर ऐसी गाडिय़ों को नहीं छूती है क्योंकि ऐसी एक गाड़ी पर कार्रवाई से जितने फोन आने लगेंगे, और जितना बवाल होने लगेगा उतनी देर में दस दूसरी गाडिय़ों पर कार्रवाई की जा सकेगी। 

अब अभी एक ऐसी गाड़ी देखने मिली जिसकी नंबर प्लेट पर लिखा हुआ तो है सामान्य नागरिक, लेकिन इसके साथ की बाकी नंबर प्लेट पर नियमों के खिलाफ पूरा छत्तीसगढ़ लिखा हुआ है। अब नियम तोडऩे के बाद भी कोई अपने आपको सामान्य नागरिक साबित करने की कोशिश करे, तो वह तो बड़ी अटपटी बात है।
(rajpathjanpath@gmail.com)

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