राजपथ - जनपथ
सुशासन तिहार के बाद तबादले?
प्रदेश में जनगणना का काम चल रहा है। इसी बीच तबादलों को लेकर भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। चर्चा है कि सरकार के कुछ मंत्री और भाजपा के कई नेता चाहते हैं कि तबादलों से रोक हटाई जाए। सरकार के पास यह विकल्प है कि जनगणना कार्य से जुड़े स्कूल शिक्षा और राजस्व विभाग के अमले को छोडक़र बाकी विभागों में तबादलों की छूट दी जाए। इस पर विचार-मंथन भी शुरू हो गया है।
मध्यप्रदेश में भी तबादलों पर लगा बैन हटाया गया है और वहां 1 जून से 15 जून तक तबादले होंगे। मध्यप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी कर्मचारी संगठनों ने तबादले शुरू करने की मांग रखी है।
हालांकि प्रदेश में अभी सुशासन तिहार चल रहा है, जिसके तहत जनसमस्याओं के निराकरण के लिए कैंप लगाए जा रहे हैं। पूरा मैदानी अमला फिलहाल इसी अभियान में व्यस्त है। ऐसे में माना जा रहा है कि सुशासन तिहार खत्म होने के बाद सरकार तबादलों पर लगी रोक हटाने पर फैसला ले सकती है।
पहले से बनी तबादला नीति में जिले के भीतर तबादले का अधिकार प्रभारी मंत्रियों को दिया गया था। अब चर्चा है कि कुछ संशोधनों के साथ नई तबादला नीति जारी हो सकती है। इस पर अंतिम फैसला कैबिनेट बैठक में लिया जा सकता है। अब देखना है कि सरकार क्या निर्णय लेती है।
बस्तर मॉनिटरिंग करेंगे विजय शर्मा
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जगदलपुर दौरे के दौरान कई बड़ी घोषणाएं की गईं। इनमें वर्ष 2031 तक बस्तर को विकसित संभाग बनाने का लक्ष्य भी शामिल है। सहकारिता विभाग भी संभाल रहे अमित शाह के नेतृत्व में बस्तर विकास का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे के लिए राज्य सरकार की भूमिका की सराहना करते हुए सीएम विष्णुदेव साय को सफल सीएम बताया। अमित शाह ने डिप्टी सीएम विजय शर्मा की भी खुलकर तारीफ की।
बताया जा रहा है कि बस्तर विकास योजना की मॉनिटरिंग में विजय शर्मा की सीधी भूमिका रहेगी। हाल ही में विजय शर्मा गुजरात दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने सहकारी क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन और वितरण व्यवस्था का अध्ययन किया। अब गुजरात के सहकारी दुग्ध मॉडल को बस्तर में लागू करने पर विचार चल रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर के आदिवासी परिवारों को मुफ्त गाय-भैंस देने की योजना पर भी काम कर रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से इस दिशा में शुरुआती काम शुरू हो चुका है।
हालांकि सहकारिता विभाग मंत्री केदार कश्यप के पास है, लेकिन बस्तर में सहकारिता आधारित योजनाओं की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी विजय शर्मा को मिलने की चर्चा है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में बस्तर में क्या बदलाव होता है।
जंगल की खामोश चौकी पर मैकू की याद

अचानकमार टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच, वीरान सडक़ किनारे एक छोटा-सा मठ है। यह उस वन प्रहरी की स्मृति है, जिसने जंगल की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवा दी, लेकिन डर के आगे पीछे नहीं हटा।
मठ है बिंदावल गांव के मैकू गोंड की याद में। उस फायर वॉचर की, जिसे 10 अप्रैल 1949 को एक बाघिन ने अपना शिकार बना लिया था। उस दिन वह अपने एक साथी के साथ जंगल की निगरानी पर निकला था। अचानक बाघिन ने हमला किया। साथी किसी तरह बच निकला, लेकिन मैकू जंगल की मिट्टी में हमेशा के लिए समा गया।
उस समय न वन्यजीव संरक्षण कानून थे, न शिकार पर सख्त पाबंदी। तीन दिन तक मचान में बैठकर रेंज अधिकारी एम.डब्ल्यू.के. खोखर उस आदमखोर बाघिन का शिकार करने में कामयाब हुए।
विडंबना देखिए, जिस दौर में मैकू मारा गया, तब वन्यजीवों की हत्या रोकने के लिए कानून तक नहीं थे। लेकिन आज, सख्त कानून होने के बावजूद शिकारी अब भी जंगलों में घूम रहे हैं। कहीं करंट बिछाकर, कहीं जहर मिलाकर, तो कहीं फंदे लगाकर बाघ, तेंदुए और दूसरे वन्यजीवों को मारा जा रहा है। ऐसे समय में मैकू गोंड की यह स्मृति और भी प्रासंगिक हो जाती है। जंगलों को केवल कानून नहीं बचाते, उन्हें बचाते हैं मैकू जैसे लोग जो जान जोखिम में डालकर भी जंगल की चौकीदारी करते हैं।
( प्राण चड्ढा के फेसबुक वाल से)


