राजपथ - जनपथ
वन अफसर का जंगल राज फरमान
छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए लोगों से सामाजिक बहिष्कार को हथियार बनाने का निर्देश दिया है। पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ अरुण कुमार पांडेय ने अपने मातहतों को निर्देश दिया है कि गांव के मुखिया, धार्मिक नेताओं और सामाजिक प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ मिलकर शिकारियों के सामाजिक बहिष्कार करने की हिदायत दी गई है।
माना कि जंगल की सुरक्षा आवश्यक है और अवैध शिकार एक गंभीर अपराध है, जिस पर कठोर सजा होनी चाहिए। मगर, सामाजिक बहिष्कार करने का आह्वान कानून की किस किताब में लिखा है। कहीं, वाइल्डलाइफ की कमान संभाल रहे अफसर अपने विभाग की नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए उकसाने वाला परिपत्र तो नहीं जारी कर रहे हैं। वे किस हक से कह रहे हैं कि जंगल में संविधान और कानूनों की अवहेलना कर जंगल का कानून चलाया जाए। वन अधिकारी खुद को न्यायपालिका से ऊपर मानकर सिविल डेथ जैसे अमानवीय तरीके अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
पेट्रोलिंग की कमी, नए स्टाफ की भर्ती न होना और मैदानी अमले की शिकारियों से साठगांठ जैसी समस्याएं लंबे समय से जंगलों को असुरक्षित बना रही हैं। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में एक गर्भवती बाइसन को बिजली के जाल में फंसाकर मार डाला गया और उसके शव को विकृत किया गया। इसी तरह, गुरु घासीदास नेशनल पार्क में एक युवा नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई, जो संभावित शिकार का मामला था। कबीरधाम जंगलों में बाइसन से लेकर तेंदुए तक इलेक्ट्रिक ट्रैप्स से मारे जा रहे हैं, और सुरजपुर जिले में रेवती वन में एक बाघ का शव मिला जिसके नाखून और दांत गायब थे, जो स्पष्ट रूप से शिकार का संकेत है। कटघोरा के पाली रेंज में कुछ दिन पहले सूअर के लिए बिछाए गए जाल में तेंदुआ फंस गया। ये घटनाएं विभाग की निगरानी की कमजोरी को दर्शाता तो है ही, मैदानी स्तर पर साठगांठ को उजागर करती हैं, जहां शिकारी बेधडक़ घूमते हैं।
हैरानी की बात यह है कि राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप भी इस अनाप-शनाप आदेश पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रहे। वे सिर्फ जंगलों और लोगों के हित की दुहाई देकर दाएं-बाएं की बात कर रहे हैं। क्या मंत्री को नहीं पता कि ऐसे अतिरिक्त-न्यायिक उपाय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हैं? वे वन्यजीव संरक्षण के नाम पर मानवाधिकारों को कुचलने की मंजूरी देते हुए लग रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में वैसे भी सामाजिक बहिष्कार एक बड़ी कुरीति रही है। इससे पीडि़त परिवार को रोजी-रोटी के लाले पड़ जाते हैं। मतांतरण, अंतरजातीय विवाह, टोने-टोटके नाम पर समाज के वही ठेकेदार सामाजिक बहिष्कार को प्रश्रय देते हैं, जिनसे पीसीसीएफ आह्वान कर रहे हैं। आज वे अफसरों के कहने पर ये काम करेंगे, कल दूसरी किसी वजह से उन ग्रामीणों को भी समाज से बाहर कर सकते हैं, जिनसे निजी दुश्मनी है।
मनरेगा पर रैली की तैयारी
प्रदेश कांग्रेस एक बड़ी रैली की रूपरेखा तैयार कर रही है। रैली की तिथि और स्थान अभी तय नहीं हुए हैं, लेकिन होली के बाद इसके आयोजन की संभावना है। रैली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के शामिल होने की चर्चा है। यह रैली मनरेगा कानून को समाप्त किए जाने के विरोध में प्रस्तावित है। जिला स्तर पर प्रदर्शन हो चुके हैं और अब प्रदेश स्तर पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है।
बताया जाता है कि हाल ही में दिल्ली में महारैली के आयोजन को लेकर चर्चा हुई थी। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज सहित अन्य नेताओं ने प्रभारी सचिन पायलट से मुलाकात की। पायलट ने प्रदेश कांग्रेस को रैली की तैयारियों में जुटने के निर्देश दिए हैं। पार्टी की रणनीति कृषि कानूनों के विरोध की तर्ज पर मनरेगा के मुद्दे पर भी व्यापक आंदोलन खड़ा करने की है।
दरअसल, पिछली बार मनरेगा मद की राशि को पीएम आवास योजना में खर्च किए जाने का आरोप लगा था। पिछली सीजन में मनरेगा के काम लगभग ठप रहे, जबकि मजदूरी देने की गारंटी तय है। होली के बाद सामान्यत: मनरेगा कार्य शुरू हो जाते हैं। ऐसे में कांग्रेस केंद्र और प्रदेश सरकार को किसान-मजदूर विरोधी करार देते हुए घेरने की तैयारी में है। हालांकि केंद्र सरकार ने मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत-जीरामजी कानून लागू करने का दावा किया है, जिसे मनरेगा से बेहतर बताया जा रहा है। कुल मिलाकर मनरेगा और जीरामजी को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमाने के आसार हैं।
...और उसके पहले गुटबाजी भी
सूरजपुर जिला कांग्रेस के पदाधिकारियों की सूची जारी होते ही विवाद खड़ा हो गया है। करीब डेढ़ दर्जन पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने वाले नेताओं को पूर्व डिप्टी सीएम टी. एस. सिंहदेव का समर्थक माना जाता है।
दरअसल, सूरजपुर जिला अध्यक्ष शशि सिंह की नियुक्ति के बाद से पार्टी के भीतर खींचतान चल रही है। शशि, दिवंगत पूर्व मंत्री तुलेश्वर सिंह की पुत्री हैं और युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय पदाधिकारी भी हैं। वह राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में करीब साढ़े तीन हजार किलोमीटर की पदयात्रा में शामिल रही थीं। इस वजह से संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। बताया जा रहा है कि शशि सिंह द्वारा जारी सूची में ऐसे नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी गई है, जो जोगी परिवार के करीबी रहे हैं और सिंहदेव विरोधी माने जाते हैं। इसकी शिकायत प्रभारी सचिव जरिता लेट फलांग तक पहुंची है, जो सरगुजा संभाग की प्रभारी भी हैं। प्रदेश नेतृत्व मामले को सुलझाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन फिलहाल विवाद थमता नजर नहीं आ रहा।


