राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : चंद्राकर मैन ऑफ़ द सीरीज
20-Dec-2025 5:54 PM
राजपथ-जनपथ : चंद्राकर मैन ऑफ़ द सीरीज

चंद्राकर मैन ऑफ़ द सीरीज

विधानसभा के इस बार का शीतकालीन सत्र पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के नाम रहा। सत्र शुरू होने के दो दिन पहले संसदीय कार्यमंत्री केदार कश्यप ने पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर को छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंट-2047 पर सत्ता पक्ष की तरफ से चर्चा की शुरूआत करने की जिम्मेदारी दी थी तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि अजय सदन में विपक्ष की कमी महसूस नहीं होने देंगे। विपक्ष ने तो चर्चा का बहिष्कार कर दिया था।

विजन डॉक्यूमेंट-2047 पर चर्चा की शुरूआत में पूर्व मंत्री चंद्राकर ने वित्तमंत्री ओ.पी.चौधरी से ही पूछ लिया कि ओपन माइंड से बात रखनी है या सिर्फ पीठ थपथपाना है। इससे हड़बड़ाए वित्तमंत्री ने ओपन माइंड से अपनी बात रखने के लिए कह दिए। इसके बाद चंद्राकर आसंदी की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, और कहा कि यह पहले स्पष्ट हो जाना चाहिए था कि किस नियम से चर्चा कराई जा रही है। शासकीय-अशासकीय संकल्प की तरह चर्चा होगी, और फिर मंत्रीजी का जवाब देंगे। उन्होंने यह भी कह दिया कि नई परंपरा की शुरूआत हो रही है। बाद में विजन डॉक्यूमेंट की सिंचाई से लेकर रोजगार और उद्योग पर खामियों को गिनाया। और यह कह गए कि इसमें मेक इन छत्तीसगढ़ की सोच को नजरअंदाज किया गया है।

कुल मिलाकर अजय चंद्राकर के उठाए सवालों से सत्ता पक्ष परेशान दिखा। अगले दिन विपक्षी कांग्रेस सदस्य सदन की कार्रवाई में हिस्सा लिया तो उन्होंने चंद्राकर की पीठ थपथपाई। नेता प्रतिपक्ष डॉ.चरणदास महंत ने तो उन्हें धन्यवाद दिया। और जब एक सवाल के जवाब में चंद्राकर, कृषि मंत्री रामविचार नेताम से एक सवाल का जवाब चाह रहे थे, तो नेताम ने चंद्राकर से कहा कि आप पहले काफी कुछ बोल चुके हैं। हास-परिहास के बीच में कांग्रेस सदस्य श्रीमती संगीता सिन्हा ने तो चंद्राकर से कह दिया कि आप 15 विधायक तोडक़र लाईए, हम आपको सीएम बना देंगे। कुल मिलाकर अजय चंद्राकर ने सुर्खियां बटोरी है। ये अलग बात है कि पार्टी उनसे असहज नजर आई है। अब इसका क्या प्रभाव पड़ता है, यह तो आने वाले समय में पता चलेगा।

अदाणी को किसी भी जगह छूना मना है?

देश के विभिन्न हिस्सों में अदाणी समूह के प्लांट्स में मजदूरों का असंतोष है। झारखंड का गोड्डा हो, जहां अप्रैल 2025 में भूमि अधिग्रहण के बदले नौकरी के वादे पर मजदूरों ने भूख हड़ताल की, या छत्तीसगढ़ का रायखेड़ा पावर प्लांट, जहां दिसंबर 2025 से मजदूर हड़ताल पर हैं। हसदेव से लेकर रामगढ़ तक जंगल की कटाई पर उठाई जा रही आवाज को तो अनसुना किया जा रहा है, मगर ऐसा लगता है कि जहां भी अडाणी का नाम आए मंत्री और अफसर आंख मूंद लेते हैं।

रायखेड़ा (तिल्दा) में स्थित अदाणी पावर प्लांट में करीब 1600 मजदूर काम करते हैं। इन मजदूरों की शिकायत है कि पिछले 10 वर्षों से उनकी मजदूरी दर नहीं बढ़ी, जो श्रम कानूनों का उल्लंघन है। 10 महीने पहले हड़ताल के दौरान प्रबंधन ने वादा किया था कि मांगों पर विचार किया जाएगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। श्रमायुक्त के पास आवेदन और कई बैठकें भी बेनतीजा रहीं। मजबूरन, 8 दिसंबर 2025 से मजदूरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की, जो आज 13वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। इस हड़ताल से बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ, और रायपुर लेबर कोर्ट ने आंदोलन को 6 महीने के लिए स्थगित करने का आदेश दिया, लेकिन मूल समस्या बनी हुई है।

दिलचस्प यह है कि इस हड़ताल से धरसीवां के पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल भी विचलित हैं। उन्होंने वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन को पत्र लिखकर मजदूरों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई की गुहार लगाई है। पत्र लिखकर कहा है कि ये छत्तीसगढ़ के गरीब मजदूर हैं, जो भूखे मरने की कगार पर हैं, और शासन-प्रशासन की चुप्पी से क्षेत्र में रोष फैल रहा है। पूर्व विधायक ने मंत्री से आग्रह किया कि विभागीय अधिकारियों को निर्देश देकर मजदूरों की उचित मांगें पूरी की जाएं। देखें, इस कड़ी ठंड में बर्फ पिघलती है या नहीं।

पुलिस हमारा बाप है....

एक वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहा है, जिसमें मुंगेली की पुलिस छेड़छाड़ के आरोपियों का सडक़ पर जुलूस निकाल रही है। पुलिस के कहने पर आरोपी नारा लगा रहे हैं कि छेडख़ानी पाप है, पुलिस हमारा बाप है। ऐसे वीडियो अक्सर दिखाई पड़ते हैं। पहले सिर्फ तस्वीरें आती थीं, मगर, जब से मोबाइल फोन पर वीडियो रिकॉर्ड करना आसान हुआ है, वीडियो क्लिप भी पुलिस शूट करती है और उसे खुद ही अधिकारिक  तौर पर जारी करती है। पोस्ट करने वाले का कहना है कि पुलिस का यह कृत्य निंदनीय है। अभी वह सिर्फ आरोपी है। सजा देना अदालत का काम है। कल को यदि अदालत में ये लोग निर्दोष साबित हो गए तो? इसके अलावा पुलिस क्यों चाहती है कि उसे कोई आरोपी अपना बाप माने। बाप तो वही होता है, जिसने उसे पैदा किया। क्या बाप के नक्शे-कदम पर बेटा चल पड़ा है? प्रतिक्रिया में बहुत से लोगों ने पुलिस के कदम को सही माना है। ऐसे ही जुलूस निकालने से अपराधियों में भय पैदा होगा। कुछ लोगों ने रायपुर के तोमर के जुलूस का भी जिक्र किया है और याद दिलाया है कि इससे लोगों का डर भागा। दोनों तरफ की बातें कुछ-कुछ सही और थोड़ी गलत हो सकती है। बस, पाठकों के विचार के लिए यह मुद्दा सामने रख दिया गया है।

टाइगर इज बैक

प्रदेश के जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष, और उपाध्यक्ष पद पर नियुक्तियां हो गई है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप, विभागीय अधिकारियों को नवनियुक्त पदाधिकारियों से संपर्क कर पदभार ग्रहण कार्यक्रम तय करने के लिए कहा, तो पता चला कि ज्यादातर बैंक अध्यक्षों ने आदेश निकलते ही पदभार ग्रहण कर लिया है। बाकी निगम मंडल के पदाधिकारियों की तरह पदभार ग्रहण की औपचारिकता नहीं निभाई।

नवनियुक्त पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण की हड़बड़ी को लेकर कई बातें हो रही है। यह कहा जा रहा है कि प्रदेश में धान खरीदी तेजी से चल रही है। इसमें बैंकों की भूमिका अहम होती है। रोजाना सैकड़ों करोड़ का भुगतान हो रहा है। चर्चा है कि नवनियुक्त पदाधिकारी पूरी व्यवस्था के भागीदार बनना चाह रहे थे, इसलिए उन्होंने आनन-फानन में पदभार ग्रहण कर लिया।

दूसरी तरफ, रायपुर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के नवनियुक्त उपाध्यक्ष अनिमेष कश्यप (बॉबी) गुरूवार को जिला ग्रामीण भाजपा पदाधिकारी की बैठक में पहुंचे तो उनका पदाधिकारियों ने जोरदार स्वागत किया। कुछ उत्साही कार्यकर्ताओं ने 'टाइगर इज बैक’ के नारे लगाए। दरअसल, अनिमेष कश्यप को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा दिया गया था। इससे पदाधिकारियों का एक खेमा नाखुश रहा, और जब उन्हें नई जिम्मेदारी मिली तो स्वागत में कोई कसर बाकी नहीं रखी।


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