राजनांदगांव

पेट दर्द से परेशान नाबालिग को पहले बताया गर्भवती, पुलिस ने रातभर नाबालिग को रखा थाने में
30-May-2026 1:56 PM
पेट दर्द से परेशान नाबालिग को पहले बताया गर्भवती, पुलिस ने रातभर नाबालिग को रखा थाने में

 सोनोग्राफी में रिपोर्ट आई निगेटिव, एसपी ने थाना प्रभारी और महिला आरक्षक को किया सस्पेंड
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 30 मई।
सोमनी इलाके में एक 14 साल की नाबालिग और उसके परिवार को उस वक्त  एक बड़े संकट का सामना करना पड़ा, जब मासिक धर्म से उठे पेट दर्द की जांच कराने पहुंची नाबालिग को चिकित्सकों ने गर्भवती ठहरा दिया। इसके बाद सोमनी पुलिस इस मामले में बेजा दखल देते हुए नाबालिग और उसके परिजनों को थाना में रातभर बिठाकर प्रताडि़त किया।
नाबालिग को न सिर्फ गर्भवती होने की वजह से जुड़े अनावश्यक सवाल पूछे गए, बल्कि परिजनों को भी थाना में रातभर स्टॉफ डराते-धमकाते रहे। इस मामले को लेकर शहर कांग्रेस अध्यक्ष जितेन्द्र मुदलियार ने पुलिस सिस्टम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने नाबालिग और उसके परिवार के साथ सोमनी थाना में हुए ज्यादती के खिलाफ बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी। मुदलियार ने यहां तक कहा कि यह दुर्भाग्य है कि जिस जिले की एसपी एक महिला है, वहां नाबालिग के साथ घोर अन्याय हुआ।

मिली जानकारी के मुताबिक सोमनी थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली एक नाबालिग 25 मई को पेट दर्द के चलते माता-पिता के साथ जांच के लिए सोमनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। वहां पर उसकी  मेडिकल किट से गर्भवती संबंधी जांच की गई। बताया जा रहा है कि जांच में नाबालिग को गर्भवती बता दिया गया। इसके कुछ मिनट बाद सोमनी पुलिस नाबालिग और उसके माता-पिता को थाना में ले गई। बच्ची के गर्भवती होने के बारे में कई तरह के सवाल पूछे गए।
सोमनी थाना प्रभारी अरूण नामदेव ने सभी को शाम 6 बजे दोबारा पूछताछ के लिए आने को कहा। इस दौरान माता-पिता पुलिस से गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन पुलिस का मन नहीं पसीजा। इधर 25 तारीख की रात को ही पीडि़ता अपने मामा के घर अंजोरा चली गई। पुलिस की टीम वहां से नाबालिग को थाना ले आई। इसके बाद लोगों में पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े होते रहे।
बताया जा रहा है कि रातभर नाबालिग को गर्भवती होने के पीछे किसका हाथ होने से जुड़ा कई बार सवाल पूछा गया, लेकिन नाबालिग पुलिस को ऐसा कुछ भी नहीं होने का जवाब देती रही। पुलिस पर आरोप है कि रातभर में बिठाकर नाबालिग को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताडि़त किया गया। इसके अलावा उसे भूखा रखा गया। नाबालिग के परिजनों का दावा है कि एक महिला आरक्षक द्वारा लगातार दुपट्टे से कई बार नाबालिग का गला दबाने का प्रयास किया गया। कुल मिलाकर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को धता बताते हुए नाबालिग को रातभर डराया-धमकाया।

 कांग्रेस की आक्रमक रवैये से मामले आया सामने
नाबालिग के साथ हुए अन्याय के खिलाफ शहर कांग्रेस अध्यक्ष जितेन्द्र मुदलियार ने आवाज बुलंद करते पुलिस कार्रवाई को कटघरे में खड़ा किया। थाना प्रभारी और स्टॉफ द्वारा किए गए कृत्य को एक तरह से अमानवीय हरकत करार देते मुदलियार ने आरोप लगाया कि एक महिला एसपी के जिले में नाबालिग के साथ हुआ यह मामला काफी संगीन है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को पुलिस महकमा मानने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि पुलिस ने रातभर नाबालिग को थाना में रखा। मुदलियार ने कहा कि तत्काल इस मामले में थाना प्रभारी और संबंधित स्टॉफ पर निलंबन की कार्रवाई होनी चाहिए। मुदलियार ने कहा कि थाना प्रभारी को नियम-कायदे का पता नहीं है। यह दुर्भाग्य है कि राजनांदगांव एक वीआईपी जिला होने के बावजूद ऐसी घटनाओं के चलते बदनामी झेल रहा है।
 

 सोनोग्राफी में गर्भवती नहीं होने की पुष्टि
इस घटनाक्रम को लेकर स्वास्थ्य महकमा भी कटघरे में है। सोमनी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक और लैब टेक्निशियन ने नाबालिग के गर्भवती होने की पुष्टि की थी। यहीं से मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने  सिर्फ एकमात्र जांच के आधार पर सीधे नाबालिग और उसके परिजनों को थाना में बेईज्जत किया। बाद में पुलिस की मौजूदगी में सोनोग्राफी टेस्ट में गर्भवती नहीं होने की पुष्टि हुई। इसके बाद परिजनों को राहत मिली। बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी अरूण नामदेव और अन्य स्टॉफ में बेहद हड़बड़ी में नाबालिग और उसके परिजनों को थाना में बिठाकर पूछताछ के नाम पर प्रताडि़त किया। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी जिम्मेदारी तय करते हुए मेडिकल आफिसर डॉ. मौन्या साहू और लैब टेक्निशियन को हटा दिया गया।
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थाना प्रभारी और महिला आरक्षक निलंबित
एसपी अंकिता शर्मा ने पुलिस पर लगे संगीन आरोपों के बाद प्रारंभिक जांच के बीच थाना प्रभारी अरूण नामदेव और महिला आरक्षक राजश्री सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि एसपी ने एक दिन पहले थाना प्रभारी को पुलिस लाइन अटैच कर दिया था। राजनीतिक दबाव और अफसरों के निर्देश के चलते एसपी ने निलंबन की कार्रवाई की है। पुलिस की इस कार्रवाई से फिलहाल यह मामला शांत हो गया है, लेकिन थानों में लोगों के साथ बदसलूकी करने और दबाव बनाने के मामले सामने आते रहे हैं। पुलिस को सामाजिक नजरिये से अपना व्यवहार बेहतर बनाना होगा। 
 


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