राजनांदगांव
कार्यकर्ताओं की टकटकी पर सरकार को रूचि नहीं, हताशा में जमीनी कार्यकर्ता
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 6 जनवरी। शहरी सरकार को अस्तित्व में आए सालभर पूरे होने के करीब है। सरकार ने कार्यकर्ताओं को राजनीतिक रूप से उपकृत करने की राजनीतिक व्यवस्था माने जाने वाले एल्डरमैन के मनोनयन पर अपनी नजर फेर ली है।
ऐसे में कार्यकर्ताओं को राजनीतिक रूप से उपकृत करने की इस व्यवस्था का फायदा नहीं मिलने से जमीनी कार्यकर्ता हताशा में है। संगठन के भीतर एल्डरमैन की नियुक्ति में की जा रही देरी को लेकर कार्यकर्ताओं ने सवाल-जवाब भी शुरू कर दिया है। संगठन के शीर्ष नेताओं के पास कार्यकर्ताओं को गोलमोल जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अगले माह 15 फरवरी को नगरीय निकाय चुनाव के एक साल पूरे हो जाएंगे। सालभर से निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति का मामला अटका पड़ा है।
बताया जा रहा है कि प्रदेश के शीर्ष नेताओं का एक धड़ा एल्डरमैन की नियुक्ति की व्यवस्था को समाप्त करने के लिए सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि नामांकित पार्षद की व्यवस्था से निकायों पर आर्थिक भार बढ़ता है। चुने गए पार्षदों की तरह एल्डरमैन को भी मानदेय से लेकर पार्षद निधि के लिए राशि मुहैया करानी पड़ती है। चर्चा है कि सरकार पर बढ़ते वित्तीय बोझ को कम करने के लिए एल्डरमैन मनोनयन की प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए सरकार के करीबी जोर लगा रहे हैं। उधर संगठन के कुछ प्रमुख नेताओं ने एल्डरमैन के मनोनयन को यथावत व अतिशीघ्र व्यवस्थित रूप देने के लिए ताकत लगाया है।
संगठन के नेताओं ने सरकार से इस परंपरा को बंद नहीं करने के लिए मौखिक चर्चा भी की है। संगठन की ओर से एल्डरमैन नियुक्ति को समाप्त करने के फैसले को कार्यक्र्ताओं के हक छीनने जैसा भी कहा है। बताया जा रहा है कि जिला संगठन की ओर से सरकार तक एल्डरमैन की सूची काफी पहले अनुमोदन के लिए भेज दी गई है, लेकिन सरकार इस दिशा में सोच-विचार करने का हवाला देकर निर्णय लेने में रूचि नहीं ले रही है। बहरहाल राजनांदगांव नगर निगम समेत निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति नहीं होने से कार्यकर्ता शीर्ष नेताओं और सरकार को लेकर खींच निकाल रहे हैं।
मेयर मधुसूदन यादव ने कहा कि संगठन और सरकार इस दिशा में निर्णय लेेगी। एल्डरमैन नियुक्ति की व्यवस्था को समाप्त करने को लेकर कोई नीतिगत निर्णय मेरी जानकारी में नहीं हुआ है। यह निर्णय शासन और संगठन के अधिकार क्षेत्र में है।


