रायपुर

पुरातत्व संचालनालय में विवाद गहराया
02-Jun-2026 6:12 PM
 पुरातत्व संचालनालय में विवाद गहराया

अविमुक्तेश्वर प्रतिमा जांच, संचालक ने भेजी रिपोर्ट

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 2 जून। गुरू घासीदास संग्रहालय के पुरावशेषों के रिकॉर्ड नष्ट होने के मामले में नया मोड़ आया है। बताया गया कि रिकॉर्ड नष्ट होने पर जिम्मेदार संयुक्त संचालक ने नोटिस पर पलटवार किया है और अपने साथ कार्य विभाजन में भेदभाव का आरोप लगाया है। खास बात यह है कि संचालक ने विभागीय सचिव को पत्र लिखकर संयुक्त संचालक पर आर्थिक अनियमितता और कार्य में लापरवाही से संबंधित कार्रवाइयों से अवगत कराया है और इस सिलसिले में मार्गदर्शन मांगा है।

बताया गया कि अमेरिका में अविमुक्तेश्वर कांस्य प्रतिमा बरामद हुई। यह प्रतिमा गुरू घासीदास संग्रहालय से चोरी हुई थी। अमेरिका से चोरी गई प्रतिमाओं को दिल्ली लाया गया है। दिल्ली से अविमुक्तेश्वर की  प्रतिमा को रायपुर लाने के लिए पुरावशेषों की पंजियों को खंगाला गया तो 6 में से 5 रजिस्टर दीमक से नष्ट हो चुके पाए गए। इनमें दुर्लभ प्रतिमाओं और अन्य पुरावशेषों का रिकॉर्ड दर्ज था। इससे हडक़ंप मच गया। इस पूरे मामले में संयुक्त संचालक जेआर भगत को नोटिस जारी किया गया तो उन्होंने विभागीय अफसरों को भी घसीट लिया। उन्होंने अपने साथ जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है।

इन तमाम आरोपों पर विभागीय सचिव ने संचालक से रिपोर्ट मांगी है। संचालक ने प्राथमिक प्रतिवेदन भेजा है। इसमें बताया गया है कि डॉ. भगत ने मई और जून 2025 में भेजे गए विभिन्न पत्रों में आरोप लगाया था कि उन्हें उनके पद के अनुरूप दायित्व नहीं दिए गए तथा महत्वपूर्ण कार्य कनिष्ठ अधिकारियों को सौंपे गए। उन्होंने इसे आदिवासी वर्ग के अधिकारी होने के कारण भेदभावपूर्ण व्यवहार बताया। अपने पत्रों में उन्होंने कार्य वितरण को पद की गरिमा के विपरीत बताते हुए अनुसूचित जनजाति आयोग तक जाने की बात भी कही।

इस तमाम बिन्दुओं पर संचालक ने शासन को भेजे प्रतिवेदन में डॉ. भगत के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उन्हें मुख्यमंत्री एवं संस्कृति मंत्री की घोषणाओं के निराकरण, जनशिकायत प्रकोष्ठ, संरक्षण एवं उत्खनन कार्य, प्रकाशन तथा अन्य महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए थे। प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि डॉ. भगत द्वारा विभागाध्यक्ष की पूर्व अनुमति के बिना शासन स्तर पर पत्राचार किया गया तथा कार्य विभाजन आदेशों की अवहेलना की गई।

संचालक ने अपने प्रतिवेदन में डॉ. भगत से जुड़े पूर्व मामलों का भी उल्लेख किया है। इनमें वर्ष 2012 में अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव, वर्ष 2013 में बिना अनुमति पुलिस को पत्र लिखना, वर्ष 2014 में तरीघाट उत्खनन से संबंधित  वित्तीय अनियमितताओं पर स्पष्टीकरण की मांग, वर्ष 2022 में वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, वर्ष 2023 में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव से जुड़ी लापरवाही तथा वर्ष 2024 में संग्रहालय की धनराशि के दुरुपयोग से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया है।

विभाग ने भगत के खिलाफ अनुशासनहीनता, नियमों के उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पुराने प्रकरणों का हवाला दिया है। इस पूरे मामले में संचालक ने दिशा निर्देश देने का आग्रह किया है। इस पूरे मामले जांच कमेटी का गठन किया जा सकता है।


अन्य पोस्ट