रायपुर
एसएफआई ने जांच की प्रक्रिया पर उठाए सवाल कहा कि निजी विवि, कुलसचिव को बचाने की हो रही कोशिश
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 23 मई। दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलसचिव की फर्जी पीएचडी डिग्री की, शिकायत पर निजी विवि विनियामक आयोग ने जांच शुरू कर दी है । एसएफआई की शिकायत पर आयोग ने तीन सदस्यीय समिति बनाई है। समिति में आयोग के सदस्य अकादमिक डॉ. व्यास दुबे, सदस्य प्रशासन डॉ. एस.के. गुप्ता और रविवि के रिटायर्ड प्रो.डॉ.एम.एल. नायक शामिल किए गए हैं।
आयोग ने शिकायतकर्ताओं को समस्त दस्तावेजों के साथ जांच समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए पत्र लिखा है । एस एफ आई के रायपुर जिलाध्यक्ष गर्व गभने, रायपुर जिलासचिव हर्ष संघाणी और गौरव गुप्ता ने संयुक्त विज्ञप्ति में कहा कि इस प्रकरण में विनियामक आयोग खुद एक पक्ष है । विनियामक आयोग को यह स्पष्ट करना है कि भारती विश्वविद्यालय को स्थापना होते ही पीएचडी की डिग्री बांटने की अनुमति कैसे प्रदान की गई एसएफआई ने यह भी सवाल उठाया है कि , स्थापना की नोटिफिकेशन के साथ ही साथ पी एच डी अधिनियम कैसे पारित हो गए जबकि बाकी विश्वविद्यालयों को स्थापना के बाद पहली डिग्री जारी करने के लिए कम से कम तीन साल का समय लगता है ।
एस एफ आई ने दूसरा तथ्य यह भी उठाया है कि विनियामक आयोग ने आरोपी कुलसचिव को अपने मूल दस्तावेजों सहित उपस्थित होने को कहा ही नहीं बल्कि शिकायतकर्ताओं को ही समस्त दस्तावेजों सहित उपस्थित होने वाट्सअप के जरिए पत्र प्रेषित किया है । वहीं छात्र संगठन ने
जिन सवालों को अपनी शिकायत पर उठाया है उसकी जांच ही नहीं हो रही । इनमें पीएचडी सुपरवाइजर की योग्यता रखती थी?
भूपेंद्र कुलदीप पी एच डी पंजीयन के वक्त एक शासकीय कर्मचारी थे उन्होंने पीएचडी करने के लिए शासन से अनुमति प्राप्त कर ली थी ? शासन ने उन्हें पी एच डी करने की अनुमति प्रदान कर दी थी ? उन्होंने अनिवार्य कोर्सवर्क पूरा किया है ? क्या उन्होंने शोध संबंधी यूजीसी नियमों परिनियमों का पालन किया है ? क्या यूजीसी नियमों परिनियमों के अनुसार उनके शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं?
यूजीसी नियमों परिनियमों का पालन हुआ है । क्या उनकी सुपरवाइजर लुमेश्वरी साहू भारती विश्वविद्यालय की नियमित प्राध्यापक थी ? इन प्रश्नों के प्रकाश में
एस एफ आई ने उपलब्ध दस्तावेज के साथ शिकायत करते हुए मामले की जांच की मांग की है।
इस मामले में निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की भूमिका भी संदिग्ध है ,भारती विश्वविद्यालय की स्थापना 2021 में हुई और इसे स्थापना के एक वर्ष के भीतर ही पीएच.डी. कार्यक्रम अनुमोदन प्राप्त हुआ — विनियम 12 के तहत आवश्यक अकादमिक परिपक्वता, संकाय शक्ति और शोध अवसंरचना प्रदर्शित किए बिना ही भारती विश्वविद्यालय को पी एच डी पाठ्यक्रम सञ्चालन की अनुमति कैसे मिल गयी ?
श्री भूपेंद्र कुलदीप ने पी एच डी करने की अनुमति का आवेदन 2019 में किया था जबकि2019 में भारती विश्वविद्यालय अस्तित्व में ही नहीं थी
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अनुमति पत्र 19 अक्टूबर 2022 को दी गयी जबकि पी एच डी हेतु पंजीयन 01 अक्टूबर 2022 को ही करा लिया गया था यहाँ भी विरोधाभास है, पीएच.डी. अधिसूचना क्चङ्क/क्रष्ठष्ट/116 के अनुसार पंजीकरण 14 अक्टूबर 2022 को हुआ था यह भी अनुमति से पूर्व ही था और इस तरह यह विनियम 13(2) का उल्लंघन है
एस एफ आई ने स्पष्ट किया कि , एस एफ आई जांच के नाम पर किए जा रहे ढकोसले का विरोध करेगी तथा कोई भी कार्यकर्ता तब तक इस फर्जी जांच समिति के समक्ष उपस्थित नहीं होगा जब तक विनियामक आयोग भारती विश्वविद्यालय के पी एच डी अधिनियम परिनियम सार्वजनिक नहीं करती और यह स्पष्ट नहीं करती कि भारती विश्वविद्यालय को स्थापना के साथ ही डिग्री बांटने की अनुमति किन नियमों के तहत और किसने दी ।
विनियामक आयोग निष्पक्ष जांच करे और जांच के बिंदु स्पष्ट करे अन्यथा एसएफआई विनियामक आयोग के भ्रष्टाचार के खिलाफ उग्र आंदोलन करने बाध्य होगी।


