रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 13 मार्च। कांग्रेस शासन काल में उजागर हुए 6,000 करोड़ रुपए के महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटाले मामले की जांच में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर की विशेष अदालत से मांग की है कि सट्टेबाजी सिंडिकेट के दो कथित संचालकों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किया जाए।
एजेंसी ने रायपुर के 6वें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश और विशेष अदालत (पीएमएलए) के समक्ष एक आवेदन दायर किया है। इस आवेदन में शुभम सोनी और अनिल कुमार अग्रवाल (उर्फ अतुल अग्रवाल) को एफईओ घोषित करने और भारत के साथ-साथ विदेशों में भी उनकी संपत्तियों को जब्त करने की मांग की गई है।
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम की धारा 4 और 12 के तहत दायर श्वष्ठ की याचिका के अनुसार, दोनों आरोपी भारत छोडक़र जा चुके हैं और माना जा रहा है कि वे इस समय संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रह रहे हैं। एजेंसी ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ बार-बार समन, गिरफ्तारी वारंट और लुकआउट सर्कुलर जारी किए जाने के बावजूद, उन्होंने जानबूझकर जांच से बचने की कोशिश की है।
वहीं विशेष अदालत ईडी द्वारा दायर इसी तरह की एक याचिका की भी जांच कर रही है, जिसमें महादेव ऑनलाइन बुक के कथित प्रमोटर सौरभ चंद्रकर और रवि उप्पल को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की मांग की गई है। इस मामले में आदेश पहले ही सुरक्षित रख लिए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत, अदालत की घोषणा अधिकारियों को उन व्यक्तियों की संपत्तियां जब्त करने का अधिकार देती है, जो आपराधिक मुकदमे से बचने के लिए भारत से भाग गए हैं। एक बार स्नश्वह्र घोषित होने के बाद, अदालत मुकदमे के पूरा होने का इंतजार किए बिना, सीधे या बेनामी संस्थाओं के माध्यम से रखी गई संपत्तियों को कुर्क और जब्त करने का आदेश दे सकती है।
ईडी की यह कार्रवाई जनवरी 2025 में दर्ज सीबीआई की एक एफआईआर से जुड़ी है, जिसमें महादेव ऑनलाइन बुक प्लेटफॉर्म से जुड़े कई मामलों को एक साथ मिला दिया गया था। सीबीआई का यह मामला छत्तीसगढ़ में आर्थिक अपराध शाखा और महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा आंध्र प्रदेश की पुलिस द्वारा पहले दर्ज की गई लगभग 77 एफआईआर के बाद सामने आया।
जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि महादेव सट्टेबाजी नेटवर्क कई सट्टेबाजी पैनल और फ्रेंचाइजी चलाता था, अपराध से अर्जित धन को जमा करने के लिए फर्जी और 'म्यूल' (किराए के) बैंक खातों का इस्तेमाल करता था, और हवाला चैनलों के माध्यम से विदेशों में धन भेजता था। संदेह है कि इन अवैध गतिविधियों से सैकड़ों करोड़ रुपये की कमाई हुई है।
ईडी के अनुसार, शुभम सोनी इस सट्टेबाजी नेटवर्क के प्रमुख प्रमोटरों में से एक था और प्लेटफॉर्म के बुनियादी ढांचे तथा वित्तीय लेनदेन से जुड़े परिचालन निर्णयों में शामिल था। अनिल कुमार अग्रवाल पर सट्टेबाजी तंत्र के तकनीकी कार्यों को संभालने का आरोप है, जिसमें सट्टेबाजी वेबसाइटों का विकास, प्लेटफॉर्म इंटरफेस की देखरेख और हवाला नेटवर्क के माध्यम से धन का हस्तांतरण शामिल है। एजेंसी ने अदालत को सूचित किया है कि आव्रजन रिकॉर्ड से पता चलता है कि सोनी फरवरी 2023 में भारत छोडक़र दुबई चला गया था, जबकि अग्रवाल अगस्त 2022 में ्रश्व के लिए रवाना हो गया था। कई बार समन भेजे जाने के बावजूद जांचकर्ताओं के सामने पेश न होने पर सितंबर 2024 में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे।
ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि सट्टेबाजी से अर्जित धन को सैकड़ों कमीशन-आधारित बैंक खातों, कई चरणों वाले लेनदेन और हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से घुमाकर, अंतत: शेल कंपनियों, रियल एस्टेट, शेयर बाजार के साधनों और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया गया था। एजेंसी ने विशेष अदालत से अनुरोध किया है कि वह दोनों आरोपियों को वैधानिक नोटिस जारी करे, जिसमें उन्हें कानून द्वारा निर्धारित कम से कम छह सप्ताह की अवधि के भीतर अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया जाए। अधिकारियों ने बताया कि यदि वे इस नोटिस का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा सकता है; ऐसा होने पर उनकी पहचान की गई संपत्तियों को ज़ब्त किया जा सकेगा और अपराध से कथित तौर पर अर्जित धन से जुड़ी अतिरिक्त घरेलू तथा विदेशी संपत्तियों को भी कुर्क किया जा सकेगा।


