रायपुर

‘इलाज’ के नाम पर मौत, गरियाबंद में अंधविश्वास, धोखाधड़ी और हत्या, महिला दोषी करार
01-May-2026 6:39 PM
‘इलाज’ के नाम पर मौत, गरियाबंद में अंधविश्वास, धोखाधड़ी और हत्या, महिला दोषी करार

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 1 मई।  विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी अधिनियम, जज पंकज कुमार सिन्हा की अदालत ने ‘चमत्कारी इलाज’ मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी ईश्वरी साहू (41) को दोषी करार दिया है। अदालत ने हत्या जैसे गंभीर अपराध में आजीवन कारावास सहित अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई है।

विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 30/2025 में पारित निर्णय के अनुसार, गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सुरसाबांधा निवासी ईश्वरी साहू पर आरोप था कि उसने बिना किसी चिकित्सकीय योग्यता के मानसिक रूप से बीमार युवती योगिता सोनवानी (18) का इलाज करने का दावा किया।

अभियोजन के मुताबिक, आरोपी ने जनवरी 2025 से मई 2025 के बीच अपने घर में पीडि़ता का तथाकथित इलाज किया। इस दौरान वह चमत्कारी तेल और गर्म पानी का इस्तेमाल करती थी, साथ ही धार्मिक प्रार्थना के जरिए ठीक करने का दावा करती थी। इलाज के दौरान पीडि़ता की हालत बिगड़ती गई और 22 मई 2025 को उसकी मौत हो गई।

मामले में मृतका की मां सुनीता सोनवानी ने 23 मई 2025 को राजिम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने अपराध क्रमांक 157/2025 के तहत मामला दर्ज कर जांच पूरी कर 21 जुलाई 2025 को चार्जशीट न्यायालय में पेश की।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 21 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनमें प्रमुख रूप से मृतका की मां सहित चिकित्सकीय विशेषज्ञ शामिल रहे। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया।महिला को आजीवन कारावास व 2,000 रुपये जुर्माना लगा है। 

धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 की धारा 4 के तहत 1 वर्ष कारावास व 1,000 रुपये जुर्माना  टोनही प्रताडऩा निवारण अधिनियम, 2005 की धारा 6 एवं 7 के तहत प्रत्येक में 1-1 वर्ष कारावास व 1,000-1,000 रुपये जुर्माना अदालत ने यह भी माना कि आरोपी ने पीडि़ता को झाड़-फूंक और अंधविश्वास के जरिए इलाज करने का दावा किया तथा धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन देने का प्रयास किया। इसके अलावा, न्यायालय ने पीडि़ता के परिजनों को पीडि़त प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा देने के निर्देश देते हुए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने को कहा है।


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