रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 31 दिसंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर बीती रात रायपुर पहुंचे।
बुधवार को अपने पहले कार्यक्रम में उन्होंने एम्स ऑडिटोरियम में प्रोफेशनल युवाओं को संबोधित किया। एक घंटे से अधिक के अपने संबोधन में भागवत ने देश काल की परिस्थितियों को प्रस्तुत करते हुए युवाओं को आगे आने का आग्रह किया।डा भागवत ने
धर्मांतरण और मतांतरण को लेकर कहा कि हमें उनके पास जाना चाहिए। सम्मान और प्रेम देना चाहिए। हमें कुछ ऐसा करना चाहिए कि वह पिछड़ापन से आगे बढ़ सकें। ऐसे में उन्हें विश्वास हो जाएगा कि हमारे लोग हमारे साथ खड़े हैं और वे मूल रूप में आना शुरू हो जाएंगे। लेकिन हमें उनके अंदर विश्वास जगाना होगा।
मंदिर के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारे देश में अलग-अलग संप्रदाय हैं और अलग-अलग लोग हैं। कई मंदिर निजी हैं और कई मंदिर सरकारी हैं। दोनों में अव्यवस्थाएं हैं। अब लोगों के ध्यान में आ रहा है कि मंदिर अपने अधीन लेना है।
उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए और याचिका लगाइए। मंदिर जिनका है, उनके ही अधीन होना चाहिए। इस पर काम चल रहा है। सवाल यह भी है कि इन चीजों को लेकर सुप्रीम कोर्ट कौन जाए। इस पर भी काम किया जा रहा है।
भागवत ने हिंदुत्व पर कहा कि हिंदुत्व कहता है कि दिखने में अलग होने से एकता का भंग नहीं होता। सामान दिखाना एकता के लिए आवश्यक नहीं है। सदियों से युगों से एक राष्ट्र जीवन चलते आया है हिंदू राष्ट्र जीवन, वह हम सभी को जोड़ता है। युवाओं और बढ़ते नशे पर ने उन्होंने कहा कि आज यूथ लोनली फील कर रहा है। फैमिली से संवाद कम हो गया है। फैमिली न्यूट्रल हो रही है। बातचीत की कमी के चलते युवाओं के सामने विकल्प के रूप में मोबाइल और नशा सामने आ रहा है।
उन्होंने अरावली पर्वत को लेकर कहा कि अब तक दुनिया ऐसा विकास मॉडल नहीं खोज पाई है। जिसमें पर्यावरण और विकास साथ-साथ चल सकें।
उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण दोनों का समानांतर विकास हो, ऐसा संतुलित विकल्प तलाशना होगा।


