रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 15 सितम्बर। अदालत के फैसले के बाद खमतराई पुलिस ने मृतिका के फर्जी हस्ताक्षर कर वसीयतनामा तैयार करने वाले तीन आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं का अपराध दर्ज किया है।
प्रकरण के अनुसार संगीता मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई कि आरोपीगण अमन तिवारी, वीरेन्द्र मिश्रा और कोमल साहू ने षड्यंत्रपूर्वक दिनांक 16 जुलाई 2021 का एक कूटरचित वसीयतनामा तैयार कर उसे असली दस्तावेज की तरह उपयोग में लाया। विशेषज्ञों की रिपोर्ट में वसीयत पर दर्ज हस्ताक्षर मृतक शिव मंगल तिवारी और उषा किरण तिवारी के वास्तविक हस्ताक्षरों से भिन्न पाए गए।
आवेदिका ने यह भी आरोप लगाया कि इस संबंध में स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बावजूद कार्यवाही नहीं हुई थी। आदेश दिनांक 18.08.2025 के द्वारा अभियुक्तगण अमन तिवारी, विरेन्द्र मिश्रा एवं कोमल साहू के विरूद्ध संज्ञेय अपराध के तथ्य दर्शित होने पर प्रस्तुत आवेदन स्वीकृत कर अपराध पंजीबद्ध कर अन्वेषण किये जाने हेतु आदेश पारित किया गया है। न्यायालय ने तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर माना कि प्रथम दृष्टया आरोपीगण द्वारा धारा 120बी, 420, 467, 468 और 471 भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध कारित किया गया है। न्यायालय के आदेश के पालन में थाना खमतराई पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर दी है।
अभियुक्त ने फर्जी वसीयतनामा 16.07.2021 को कुट रचित कर तैयार किया तथा आवेदिकागण के माता के मृत्यु दिनांक से तीन माह पूर्व के दिनांक को निष्पादित किया। यह भी तर्क किया मृतक स्व. शिव मंगल तिवारी के हस्ताक्षर जो कथित एवं फर्जी वसीयत में अभियुक्तगण द्वारा अंकित किया गया। स्व. श्रीमती उषा किरण तिवारी के हस्ताक्षर को उसके किरायानामा आदि दस्तावेजों में अंकित हस्ताक्षर से मिलान किये जाने पर अलग होना पाया गया। इस मामले में शिकायत के बाद भी पुलिस ने कोई कार्यवाई नहीं की थी। इसे लेकर पीडि़ता ने अदालत में प्रकरण दायर कराया गया था। वसीयतनामा में दर्ज उषा किरण तिवारी एवं शिव मंगल तिवारी के हस्ताक्षरों की विशेषज्ञ जांच कराये जाने पर वसीयत के हस्ताक्षर से भिन्न हस्ताक्षर शिव मंगल तिवारी के द्वारा न्यायालीन आदेश पत्रिका में किया जाना तथा उषा किरण तिवारी द्वारा इकरारनामा में किया जाना व्यक्त किया है। इस प्रकार आरोपीगण ने षडयंत्र कर कुट रचित फर्जी वसीयतनामा का निर्माण छल के प्रयोजन से किया एवं उसे असली के रूप में प्रयोग में इस पर न्यायालय ने धारा 120बी, 420, 467, 468 एवं 471 भारतीय दण्ड संहिता के तहत आरोपीगण के विरूद्ध प्रथम सूचना पत्र दर्ज किये जाने खमतराई को निर्देशित किया गया।


