रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 20 अगस्त। साय कैबिनेट में बुधवार को तीन मंत्रियों को शपथ ली। इनमें दुर्ग के गजेन्द्र यादव, अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल, और आरंग विधायक गुरू खुशवंत साहेब हैं। भाजपा हाईकमान ने सीनियर विधायकों की जगह पहली बार के विधायकों को मंत्री बनाने हरी झंडी दी थी।
वैश्य समाज से आने वाले राजेश अग्रवाल को अंबिकापुर में दिग्गज कांग्रेस नेता टी.एस.सिंहदेव का करीबी माना जाता था। वो कांग्रेस की टिकट से ही लखनपुर नगर पंचायत के अध्यक्ष रहे, और वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हो गए। पांच साल उन्होंने अंबिकापुर इलाके में काफी मेहनत भी की। इसके बाद भाजपा ने उन्हें लगातार हार रही अंबिकापुर सीट से राजेश अग्रवाल ने कड़े मुकाबले में डिप्टी सीएम टी.एस.सिंहदेव को मात दी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें मंत्री बनाने का फैसला लिया। चूंकि बृजमोहन अग्रवाल मंत्री पद छोडक़र सांसद बन गए थे, ऐसे में वैश्य समाज से एक मंत्री बनाया गया था।
इससे परे दुर्ग शहर के विधायक गजेन्द्र यादव की पृष्ठभूमि संघ की रही है। गजेन्द्र के पिता बिसरा राम यादव आरएसएस के प्रांत प्रमुख रहे हैं। गजेन्द्र भी भाजपा के अलग-अलग पदों पर काम कर चुके हैं। उनका नाम वर्ष-2013 के विधानसभा चुनाव में साजा सीट से उभरा था, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दी। वर्ष- 2023 में उन्हें मौका मिला, और उन्होंने दुर्ग शहर से रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल की। छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग में साहू समाज के बाद यादव दूसरी सबसे बड़ी आबादी है, ऐसे में गजेन्द्र की पृष्ठभूमि को देखकर मंत्री बनना तय माना जा रहा था।
इससे परे भाजपा अनुसूचित जाति वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। ऐसे में पार्टी ने सतनामी समाज के गुरू बालदास के पुत्र खुशवंत साहेब के नाम पर मुहर लगाई है। खुशवंत कांग्रेस में रह चुके हैं। वो भूपेश सरकार में वन औषधि बोर्ड के उपाध्यक्ष भी थे।
विधानसभा चुनाव से पहले खुशवंत साहेब ने भाजपा का दामन थाम लिया, और भूपेश सरकार के मंत्री डॉ.शिव कुमार डहरिया को मात दी। खुशवंत साहेब को मंत्री बनाकर अनुसूचित जाति वर्ग को संदेश देने की कवायद है।


