रायपुर
रायपुर, 19 अगस्त। छत्तीसगढ़ में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। संसद में सांसद भोजराज नाग और अन्य सदस्यों द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने कहा कि सरकार ने एसएचजी के कारोबार को आसान बनाने, बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने और उन्नत प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए ठोस पहल की है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एसएचजी उत्पादों को राष्ट्रीय बाज़ार से जोडऩे के लिए प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों फ्लिपकार्ट, अमेजऩ और मेशो के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही पतंजलि के साथ भी करार किया गया है, ताकि ग्रामीण उत्पादों को बड़े स्तर पर बढ़ावा मिल सके। मंत्रालय का अपना ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ई-सरस (222.द्गह्यड्डह्म्ड्डह्य. द्बठ्ठ) और ओएनडीसी (ह्रहृष्ठष्ट) नेटवर्क पर भी एसएचजी उत्पादों को बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उद्यम स्थापित करने और आगे बढ़ाने के लिए स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम , वन स्टॉप फैसिलिटी सेंटर और माइक्रो एंटरप्राइज़ डेवलपमेंट जैसी योजनाओं के तहत मदद दी जा रही है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कार्यरत एसएचजी को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना के अंतर्गत बीज पूंजी और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। साथ ही, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सरस आजीविका मेलों के माध्यम से इन उत्पादों को विपणन सहयोग भी दिया जाता है।
प्रशिक्षण के मोर्चे पर डॉ. पेम्मासानी ने बताया कि एसएचजी महिलाओं को नियमित रूप से विपणन कौशल, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, सोशल मीडिया प्रचार और ई-मार्केटिंग जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (हृढ्ढक्रष्ठ&क्कक्र) ने पिछले तीन वर्षों में 44 क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें मूल्य श्रृंखला विकास, निर्यात विपणन और बिक्री संचार जैसे उन्नत विषय शामिल थे।
केंद्र सरकार का मानना है कि इन पहलों से न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि छत्तीसगढ़ के एसएचजी उत्पादों को राष्ट्रीय बाज़ार में और अधिक पहचान तथा प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।


