रायपुर

14 महीनों से पेंशन, उपादान से वंचित हैं कृविवि के रिटायर प्रोफेसर, टीचर्स, कर्मचारी
18-Aug-2025 8:29 PM
 14 महीनों से पेंशन, उपादान से वंचित हैं कृविवि के रिटायर प्रोफेसर, टीचर्स, कर्मचारी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 18 अगस्त। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ की अगुवाई में रविवार  को कृषि विश्वविद्यालय सभागार में रिटायर प्रोफेसर और अन्य  कर्मचारियों की बैठक हुई। बैठक में  महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव, कार्यकारी प्रांताध्यक्ष जे पी मिश्रा, संभागीय अध्यक्ष प्रवीण कुमार त्रिवेदी,  विश्वविद्यालय पेंशनर्स टीचर्स एसोशिएशन के अध्यक्ष डॉ एन के चौबे  की उपस्थिति रही। इसमें पेंशनर्स की समस्याओं पर विचार विमर्श के बाद इसके निराकरण हेतु कुलपति और संचालक लोकल फंड आडिट से भेंट करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में डॉ एस एस बघेल. रिटायर्ड कुलपति. केंद्रीय विश्वविद्यालय मणिपुर, डॉ के सी अग्रवाल रिटायर्ड अधिष्ठाता, डॉ आर के बाजपेई रिटायर्ड संचालक अनुसंधान सेवाएं,डॉ प्रशांत दुबे अधिष्ठाता रिटायर्ड तथा डॉ अरविंद गेड़ा, प्रो.अशोक दुबे, प्रो.हेमंत कुमार अवस्थी तथा प्रो.के के साहू आदि ने  विश्वविद्यालय प्रशासन की रवैए पर चिंता जाहिर किया। सभी ने  विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लोकल फंड आडिट से मिलीभगत कर सेवानिवृत अधिकारियों और कर्मचारियों का शोषण करने का आरोप लगाया है।

बैठक में बताया गया कि रिटायर होने के एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पेंशन प्रकरण को लटका कर रखा गया है। इससे लोग पेंशन और उपादान के साथ साथ जीपीएफ राशि के भुगतान से वंचित आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।उन्हें शासन के आदेश को नजरअंदाज कर 90प्रतिशत अंतरिम पेंशन भी नहीं देकर अपराधिक कृत्य किया जा रहा है। कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन को पेंशन में विलंब पर पेंशनर्स को नियमानुसार 9 प्रतिशत दर से पेंशन और उपादान पर ब्याज का भुगतान करने की मांग की गई है।

श्री नामदेव ने  केंद्र सरकार के समान राज्य सरकार के साथ मिलने वाला महंगाई राहत (डी आर) देने में  कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोताही बरतने पर आश्चर्य जताया है। हद तो यह भी है कि छठवां और सातवां वेतनमान का एरियर भी दबाए बैठे हैं। इस सारे मामले को लेकर 15 दिन के अंदर विश्वविद्यालय और लोकल फंड आडिट के विरुद्ध आंदोलन छेडऩे का निर्णय लिया गया है। इन सभी मामलों को लेकर कुलाधिपति, मुख्यमंत्री, कृषिमंत्री और वित्त मंत्री से प्रत्यक्ष भेंट करने का निर्णय लिया गया है।


अन्य पोस्ट