रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 18 अगस्त। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ ने कहा कि कानून-व्यवस्था संभालने वाले पुलिस विभाग के तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की स्थिति चिंताजनक है।
12 माह, 24 घण्टे जनता की सुरक्षा व सेवा में तैनात है, यह पुलिस ही अपने बुनियादी सुविधाओं और न्याय से वंचित हैं ।यदि न्याय पाने पुलिस, नगरसेना व जेल विभाग के कर्मचारियों को हर बार उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ही जाना पड़ रहा है तो कैसी आजादी है। सोमवार को पत्रकारों से चर्चा में संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने इन कर्मचारियों के लिए आधा दर्जन से अधिक मांगे रखी? दीवान ने नए कानून के हिसाब से विवेचकों को बड़े अपराधों की विवेचना के बाद चालान प्रस्तुत करने पेनड्राइव देने कहा।अभी विवेचक अपने पैसों से पेनड्राइव खरीद कर न्यायालय में जमा कर रहे हैं।
पुलिस कर्मियों को समयमान वेतनमान के साथ पदोन्नति दी जाए ।इससे आरक्षक पदोन्नत हो कर प्रधान आरक्षक बनेंगे और विवेचकों की संख्या भी बढ़ेगी। 100 रूप?ए केआहार भत्ते में वृद्धि, वाहन भत्ता देने की मांग की है।
दीवान ने कहा कि सिपाही की तनख्वाह आज भी चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के बराबर है, जबकि कार्य की कठिनाई, जोखिम और जिम्मेदारी उससे कहीं अधिक है। हाउस रेंट 1500-2000 प्रति माह को बढ़ाकर ?5000-7000 या उससे अधिक किया जाए। बड़े अधिकारियों की समय पर पदोन्नति हो जाती है परंतु छोटे कर्मचारियों को कई-कई वर्षों तक पदोन्नति नहीं मिलती। आरक्षक से हवलदार व सहायक उपनिरीक्षक के पदोन्नति के नियम अभी तक नहीं बना पाए हैं। कार्य के घंटे निश्चित नहीं है, छुट्टियों की कमी है। साप्ताहिक अवकाश की भी व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है।


