रायपुर

पूरे मानव जाति को जीने की कला सिखाई तुलसीदास ने - डॉ. त्रिपाठी
03-Aug-2025 8:33 PM
 पूरे मानव जाति को जीने की कला  सिखाई तुलसीदास ने - डॉ. त्रिपाठी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 3 अगस्त। संस्कृत भारती संगठन के महामंत्री डॉ. दादूभाई त्रिपाठी ने कहा कि रामायण के रचयिता तुलसीदास जी ने सरयूपारीण ब्राह्मण समाज में जन्म लेकर रामचरित मानस की रचना कर पूरे मानव जाति को जीने की कला सिखाई।  

वे सरयूपारीण ब्राह्मण सभा रायपुर  द्वारा आज आयोजित तुलसीदास की जयंती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा की तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना कर भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में मानव जीवन कैसा हो इस पर प्रकाश डाला।   कार्यक्रम में उपस्थित अशोक चतुर्वेदी ने कहा कि तुलसीदास के जन्म मूल नक्षत्र में हुआ इसकी भी गणना कर व्याख्या की जानी चाहिए।

सरयूपारीण ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष डॉ. सुरेश शुक्ला ने कहा कि तुलसीदास ने जन्म तो सरयूपारीण समाज में लिया लेकिन उनकी व्यापकता स्वीकार्यता हर समाज में हे। उन्होंने भगवान श्रीराम की कथा जनजन की भाषा में लिखकर हर घर तक पहुंचाई। इस अवसर पर समाज के कार्यक्रम में रमाकांत शुक्ला डी एस परोहा, राममुरत तिवारी कैलाश तिवारी संगम त्रिपाठी, विश्वेंद्र , राजेंद्र शर्मा, राजेश त्रिपाठी, आचार्य आर के पांडे , यदुवंश मनी त्रिपाठी, उमाकांत तिवारी, शिवबदन मिश्रा, अरुण दुबे प्रवीण चौबे, सत्यनारायण शर्मा, संतु मिश्रा, उपस्थित थे। पुरस्कृत इस अवसर पर मेघावी बच्चों कु. जाया तिवारी, कु. श्रेया पाण्डेय, कु. उन्नति शर्मा, कु. ओजस्वी शर्मा, कु. जाया तिवारी, कु. आल्याशा दुबे, कु.संस्कृति तिवारी, कु. अदिति दीक्षित, कु. पारीजल पाण्डेय, अतुल मिश्रा,  कु. साक्षी पाण्डेय , तेजस त्रिपाठी एवं अभ्युदया झा , कु. यशिका तिवारी, कु.अंजली तिवारी, शौर्य शुक्ला  कु. मोहिनी दुबे मेघावी छात्र छात्राओं को पुरस्कार वितरण  कर उन्हें सम्मानित किया। आभार प्रदर्शन अजय तिवारी  ने किया।


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