रायपुर
बड़े कारोबारी को फायदा पहुंचाने का था आरोप
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 31 जुलाई। आखिरकार विरोध के बाद डीकेेएस पीजी इंस्टीट्यूट रिसर्च सेंटर के लिए लॉन्ड्री सेवा के टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। बताया गया कि लॉन्ड्री सेवा के लिए कुछ ऐसी शर्तें जोड़ी गई थी, जिससे स्थानीय लॉड्री कारोबार से जुड़े लोग प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गए थे। शिकायत स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तक पहुंची, और फिर जायसवाल के हस्तक्षेप के बाद टेंडर निरस्त किया गया।
बताया गया कि डीकेएस पीजी इंस्टीट्यूट रिसर्च सेंटर के 400 बिस्तर के लॉन्ड्री सेवा के लिए टेंडर बुलाए गए थे। इसमें टर्न ओवर 5 करोड़ रुपये सालाना रखा गया था। इसके अलावा कुछ ऐसी भी शर्तें भी जोड़ दी गई थी, जिससे बड़े लॉन्ड्री कारोबारी को ही फायदा पहुंच रहा था।
आरोप यह भी था कि एक बड़े कारोबारी को फायदा पहुंचाने के लिए नियम-शर्तें ऐसी बनाई गई कि बाकी परंपरागत लॉन्ड्री के कारोबार से जुड़े लोग बाहर हो गए थे। इसके बाद विरोध शुरू हुआ। धोबी समाज के प्रमुख सूरज निर्मलकर की अगुवाई में पिछले दिनों एक प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मुलाकात की, और उन्हें वस्तुस्थिति की जानकारी दी।
जायसवाल ने मामले पर विभाग से रिपोर्ट मांगी। यह बात सामने आई कि 14 सौ बिस्तर के अस्पताल के लॉन्ड्री सेवा के लिए कभी इस तरह की शर्तें नहीं लगाई गई थी। यहां परंपरागत तौर पर अनुभवी को ही प्राथमिकता दिया जाता रहा है। पिछड़ा वर्ग संगठन के लोग भी इस पूरे मामले को लेकर सक्रिय रहे। शिकायत सही पाए जाने के बाद गुरुवार को विधिवत आदेश जारी कर टेंडर को निरस्त कर दिया गया। अब नए सिरे से टेंडर बुलाए जाएंगे।


