रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 25 जुलाई। दादाबाड़ी में चल रहे आत्मोत्थान चातुर्मास प्रवचन में साध्वी हंसकीर्ति शुक्रवार को कहा कि धर्म-आराधना करते समय मन में उत्साह होना चाहिए क्योंकि जितना उत्साह होगा धर्म उतना ही प्रभावी होगा।
उत्साह तीन मूल शब्दों से बना है—पहला है उमंग। किसी भी कार्य की शुरुआत करने से पहले मन में उमंग होनी चाहिए। उमंग के बिना किया गया कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। दूसरा है साहस—उमंग तो कई लोग लाते हैं, लेकिन साहस की कमी के कारण अधूरे रास्ते में रुक जाते हैं। साहस का अर्थ है अपने पास की चीजों का त्याग करना, साथ ही उन फलों का भी त्याग करना जो भविष्य में मिलने वाले हैं। तीसरा है हिम्मत—अपने साथ-साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाने का सामर्थ्य, दूसरों की सहायता करने का भाव। केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी कार्य करने की हिम्मत होनी चाहिए। साध्वीजी कहती हैं कि गुणों का पर्वत चढऩा कठिन है, पर दोषों की खाई में गिरना अत्यंत आसान।
गिरनारी नेमि जन्मकल्याणक महोत्सव 29 को
दादाबाड़ी में 22 वें तीर्थंकर नेमिनाथ के जन्मकल्याणक के अवसर पर 29 तारीख को गिरनारी नेमि जन्मकल्याणक महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। इस दिन सुबह 9 बजे भगवान का अष्टोतरी अभिषेक होगा। जिसमें नासिक के सुप्रसिद्ध संगीतकार हर्ष शाह अपनी प्रस्तुति देंगे और विधिकारक राकेश भाई, होंगे। वहीं, रात को 8.30 बजे गिरनार से भव पार का आयोजन किया जाएगा जिसमें नासिक के सुप्रसिद्ध संगीतकार हर्ष शाह अपनी प्रस्तुति देंगे और संचालक संकेत गांधी होंगे।
नेमिनाथ जन्मकल्याणक के दिन एकसना की व्यवस्था होगी। इसमें भाग लेने दादाबाड़ी ऑफिस में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।


