रायपुर

कर्मबल ही है कि कोई चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री तक का सफर तय कर सकता है - साध्वी शुभंकरा
14-Aug-2023 11:09 AM
कर्मबल ही है कि कोई चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री तक का सफर तय कर सकता है - साध्वी शुभंकरा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 13 अगस्त। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में रविवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि संसार का सारा चक्र शक्ति द्वारा चलता है। यह शक्तियां धन बल, मिथ्या बाल, क्रिया बल जैसे बलों से संचालित होती है। इन सभी में सबसे शक्तिशाली एवं सर्वोपरि कर्म बल है। इतिहास साक्षी है कि पांच पांडवों के पास शक्ति, धन, बल सब कुछ था फिर भी वह वनवास में रहे। महावीर स्वामी को 400 दिनों तक आहार नहीं मिला। शरद कुमार चक्रवर्ती क्षण भर में 16 बीमारियों से ग्रसित हो गए। 18 देश के महाराज कुमारपाल राजा को बेटे ने जेल में डाला और इतना ही नहीं हर दिन 500 कोड़े भी मारे। यह कर्म हमें क्या-क्या नहीं दिखाता, साधारण व्यक्ति को अभिनेता बना देता है। आप सोचिए कि कोई चाय बेचने वाला इंसान प्रधानमंत्री तक का सफर भी तय कर सकता है और कोई पूरे बॉडीगार्ड के साथ चले तो भी उसे एक गोली आकर लग सकती है। हम समझ नहीं सकते इस लीला को क्योंकि इन पर कर्म हावी होता है।

साध्वी ने बताया कि एक श्रावक ने गुरु से पूछा कि कर्म में अनंत शक्ति होती है और आत्मा में भी अनंत शक्ति होती है लेकिन दोनों में फर्क क्या है, किसमें ज्यादा है और किसमें कम। गुरु कहते हैं कि अध्यात्म से हमें शक्ति मिलती है और कर्म से प्रयोग किए जाते है और प्रयोग ही सफल होता है। आज हम शोरूम, बैंक आदि में स्ट्रांग रूम देखते हैं। इन स्ट्रांग रूम में चारों और लोहे की दीवार होती है। अब आप बताइए कि एक तरफ लोहा है और दूसरी तरफ पानी है दोनों में शक्तिशाली कौन है। दिखने में तो लोहा बहुत कठोर और बलवान लगता है और पानी को आप देखो तो वह बहुत ही लचीली और सारे आकार में ढल जाने वाली होती है। अगर लोहे में पानी पड़ जाए तो उसमें जंग लग जाता है और वह निर्बल हो जाता है। वैसे ही कर्म बल लोहे के समान होता है और आत्मा का कर्म बल पानी के समान होता है।


अन्य पोस्ट