रायगढ़

कबाड़ बीनने के बहाने मासूम का अपहरण व रेप का प्रयास
05-Aug-2025 10:07 PM
कबाड़ बीनने के बहाने मासूम का अपहरण व रेप का प्रयास

20 साल की सजा, जुर्माना भी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायगढ़, 5 अगस्त। कबाड़ बीनने के बहाने बालिका को सुनसान इलाके में लेजाकर उसके साथ रेप करने की कोशिश करने वाले आरोपी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफटीएससी पॉस्को न्यायालय ने अलग-अलग धाराओं में 20 साल के कठोर कारावास और जुर्माने से दंडित किया है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि पीडि़ता की मां ने सिटी कोतवाली थाने में शिकायत करते हुए बताया था कि घरेलू विवाद के चलते वह अपनी लडक़ी 5 साल 8 माह तथा उसका भाई 10 साल को लेकर शहर के केवड़ाबाड़ी बस स्टैण्ड के यात्री प्रतीक्षालय में रहती थी और बगल में ही महराज होटल में काम करती थी। यात्री प्रतीक्षालय में कैलाश राजपूत निवासी केछवाकानी, जशपुर भी बगल में सोता था। जो कि कबाड़ बीनने का काम करता था। 11 अगस्त 2023 शुक्रवार को वह बुखार के कारण प्रतीक्षालय में सो रही थी उसका लडक़ा एवं पीडि़ता बेटी खेल रहे थे, इसी बीच शाम 4 बजे पीडि़ता का भाई अपनी मां को जगाते हुए बताया पीडि़ता को कैलाश राजपूत बुलाकर कहीं ले गया है जिसे आसपास पतासाजी किये, लेकिन पता नही चला। 

पीडि़ता की मां ने सिटी कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई जिस पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 363, 368 के तहत अपराध दर्ज कर मामले को जांच में ले लिया। 15 अगस्त को पीडि़ता को सेवा भारती मातृछाया जबलपुर से बरामद कर रायगढ़ लाया गया। पूछताछ के दौरान पीडि़ता ने बताया कि आरोपी कैलाश राजपूत कबाड़ बीनने के लिये अपने साथ ले गया था जहां रेलवे स्टेशन में रखा और सूनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश करता रहा। पीडि़ता के चिल्लाने पर उसके साथ मारपीट करते हुए मारकर फेंकने की भी धमकी देता रहा।

इस सूचना के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 323, 506, 366 (क) 376 (2) (ढ) एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 06 पास्को एक्ट जोड़ते हुए आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां दोनों पक्षों की सुनवाई पश्चात अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफटीएससी पास्को न्यायालय के पीठासीन अधिकारी देवेन्द्र साहू ने आरोपी कैलाश राजपूत को धारा 363, 366, 376कख, 376 (2) (ढ) धारा 376(2), 323 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 6 के आरोप में दोषसिद्ध किया और उपरोक्त धाराओं के तहत अलग-अलग धाराओं में कुल 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा 8 हजार के अर्थदण्ड से दंडित किया है। न्यायालय के आदेश में आरोपी के द्वारा अर्थदण्ड न पटाने पर अलग-अलग धाराओं में पृथक से सजा भुगताने का भी प्रावधान किया गया है।


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