महासमुन्द
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 29 जुलाई। जिला भाजपा अध्यक्ष और पूर्व संसदीय सचिव रूपकुमारी चौधरी ने कोरोना संक्रमण से हुई मौतों का प्रमाण पत्र देने में किए जा रहे हीलाहवाली को लेकर प्रदेश सरकार की नीयत और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है।
श्रीमती चौधरी ने जारी विज्ञप्ति में कहा है कि मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण कोरोना मृतकों के स्वजन शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण की रोकथाम और कोरोना में मृत लोगों के परिवार को शासकीय लाभ पहुंचाने की बड़ी-बड़ी डींगें हांक रही प्रदेश सरकार और उसका प्रशासनिक अमला महीनों बीतने के बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र देने के प्रति संजीदा नहीं है।
पिथौरा के एक ऐसे ही मामले का जिक्र कर श्रीमती चौधरी ने बताया कि वहां वार्ड तीन निवासी टेकू साहू की भाभी का 16 अप्रैल को वहां के स्वास्थ्य केंद्र में निधन हुआ था। उनकी जांच रिपोर्ट के मुताबिक वे कोरोना संक्रमित थीं। कोविड गाइडलाइन के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार भी किया गया था। बाद में उनके परिवार के नौ सदस्यों की जांच की गई और वे भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।
श्रीमती चौधरी के मुताबिक एक सादी पर्ची में उन्हें कोरोना पॉजिटिव होना लिखकर दे दिया गया और उसकी आनलाइन एंट्री नहीं की गई थी। इस लापरवाही के चलते अब मृतका के बच्चों को स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम शाला में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। मृतका के स्वजनों को बताया गया है कि चूंकि ऑनलाइन एंट्री नहीं हुई है, इसलिए शासन द्वारा दी जा रही सहूलियतों का लाभ उन्हें नहीं मिलेगा।
श्रीमती चौधरी ने इसे सरकार और उसके सिस्टम की लापरवाही बताया और कटाक्ष किया कि अब पिथौरा के कांग्रेस पार्षदों द्वारा सरकारी अस्पताल की लापरवाही के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन करने के एलान से यह साफ हो गया है कि कोरोना महामारी को लेकर प्रदेश सरकार कितनी लापरवाह और संवेदनहीन हो चली है। जब कांग्रेस से जुड़े लोग ही अपनी सरकार के इंजामात से नाराज हैं, तो प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली और नीयत स्वयमेव जगजाहिर हो रही है।


