महासमुन्द

उठाव रोक किसानों को धान बेचने से वंचित करना चाहती है सरकार-विनोद चंद्राकर
25-Jan-2026 9:39 PM
उठाव रोक किसानों को धान बेचने से वंचित करना चाहती है सरकार-विनोद चंद्राकर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 25 जनवरी।
पूर्व संसदीय सचिव व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने कहा कि शासन द्वारा धान उठाव में रोक लगाकर खरीदी प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
अभी भी जिले भर के सोसायटियों में धान बेचने के लिए अपनी बारी का इंतजार हजारों किसान कर रहे हैं। अकेले बरोंडाबाजार सोसायटी में ही 218 किसानों का टोकन अभी तक नहीं कट पाया है। धान का उठाव नहीं होने के कारण यहां जाम की स्थिति निर्मित हो गई है। खरीदी के लिए महज 4 दिन का समय ही शेष है। ऐसे में इन किसानों को धान नहीं बिक पाने की चिंता सता रहा है। बरोंडाबाजार सोसायटी में 218 छोटे किसानों से 10 हजार क्विंटल से अधिक का धान खरीदा जाना शेष है। किसानों का कहना है कि उनका धान नहीं बिकने से वे सोसायटी का चक्कर लगा रहे हैं। खरीदी लिमिट और उठाव नहीं होने के कारण सोसायटी में धान जाम है। टोकन जारी नहीं हो पाने से किसान अिधक परेशान हैं।
श्री चंद्राकर ने कहा कि यही स्थिति रहा तो समय.सीमा में इन किसानों का धान नहीं बिक पाएगा। धान खरीदी के लिए किसान समय आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इन किसानों में अधिकांश ऐसे भी किसान हैं जो रबी फसल लेते हैं। लेकिन खरीफ  का धान अभी तक नहीं बिका है। ऐसे में वे रबी की तैयारी भी नहीं कर पा रहे हैं। खेत की मताई, जोताई आदि के लिए उनके पास पैसे नहीं है। उन्होंने कहा कि धान का उठाव रोककर सरकार पुन:सोसायटियों के धान को चूहों के नाम पर गायब करने की साजिश रच रही है। क्योंकि महासमुंद सहित प्रदेश के विभिन्न सोसायटियों में सरकारी चूहों ने करोड़ों का धान खाया है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि एक तरफ  जिले के हजारों किसान अपना धान नहीं बेच पाए हैं, उन्हें टोकन तक जारी नहीं किया जा रहा। दूसरी ओर सोसायटियों में करोड़ों का धान बफर लिमिट पार कर चुका है। धान खरीदी पूरी तरह बाधित हो रहा है। वहीं, अब सरकार धान का उठाव रोककर बचे हुए किसानों को धान बेचने से वंचित करना चाहती है। महासमुंद जिले में अभी तक लगभग 25 हजार किसान धान नहीं बेच पाए हैं। इसके अलावा किसानों को परेशान करने की नीयत से सरकार किसानों के घर जाकर उनका जमीन व धान का भौतिक सत्यापन करने की बात कह रही है। इससे यही सिद्ध होता है कि सरकार किसानों को पूरी तरह परेशान कर धान बेचने से वंचित करना चाहती है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में कभी भी किसानों को इस तरह की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा था। पूरे 5 साल निर्बाध रूप से धान खरीदी की गई। भूपेश सरकार की बेहतर नीति के कारण सोसायटियों में धान जाम होने जैसा हालात कभी सामने नहीं आया। 72 घंटे में उठाव की नीति बनाकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों को राहत प्रदान की। प्रदेश के समस्त किसानों का एक-एक दाना धान खरीदा गया। आवश्यकता पडऩे पर खरीदी समय बढ़ाकर किसानों का धान खरीदा। लेकिन वर्तमान में भाजपा की साय सरकार अपने दो वर्ष के कार्यकाल में ही धान खरीदी में पूरी तरह असफल साबित हुआ है।


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