महासमुन्द

रकबा सुधार के चक्कर में शेष रकबा भी पोर्टल से गायब
25-Jan-2026 6:43 PM
रकबा सुधार के चक्कर में शेष रकबा भी पोर्टल से गायब

पोर्टल की तकनीकी खराबी ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 25 जनवरी। धान खरीदी अंतिम चरण में है लेकिन महासमुंद जिले के सैकड़ों किसानों के लिए यह समय उत्सव के बजाय मानसिक तनाव का कारण बन गया है। शासन द्वारा गिरदावरी और रकबा त्रुटि सुधार के दावों के बीच एक बड़ी तकनीकी खामी सामने आई है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिन किसानों ने अपने रकबे खेत के क्षेत्रफल में रकबा सुधार के लिए आवेदन दिया था, उनका शेष रकबा भी पोर्टल से गायब हो चुका है। उन्होंने रकबा सुधार के लिए आवेदन दिया था, सुधार होना तो दूर, उनका पहले से दर्ज रकबा भी अब ऑनलाइन पोर्टल पर शून्य प्रदर्शित हो रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक 11 हजार 232 किसानों का भौतिक सत्यापन किया जा चुका है और उनके पास भारी मात्रा में धान उपलब्ध है। इसके बावजूद, रकबा शून्य दिखाने की वजह से हजारों किसान टोकन प्रक्रिया से बाहर होने की कगार पर हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते पोर्टल की खराबी ठीक नहीं की गई, तो वे अपनी साल भर की मेहनत का उचित मूल्य पाने से वंचित रह जाएंगे। प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को तत्काल दूर किया जाए और जिन किसानों का रकबा शून्य दिखा रहा है, उनके लिए विशेष व्यवस्था कर धान खरीदी सुनिश्चित की जाए।

मिली जानकारी के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल पर आंकड़ों का अपडेशन पिछले 7 जनवरी से ठप पड़ा है। सुधार के बाद जो संशोधित आंकड़े पोर्टल पर दिखने चाहिए थे, वे गायब हैं। इसके परिणामस्वरूप किसान जब अपना धान बेचने के लिए टोकन कटाने पहुंच रहे हैं, तो पोर्टल पर रकबा शून्य होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

प्रशासन ने कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों आईओ और पटवारियों को भौतिक सत्यापन और त्रुटि सुधार के लिए ऑनलाइन विकल्प और अधिकार तो दिए हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर की तकनीकी बाधा के सामने वे भी बेबस नजर आ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पोर्टल पर डेटा रिफ्लेक्ट नहीं होगा, वे आगे की प्रक्रिया पूरी करने में असमर्थ हैं। धान खरीदी की अंतिम तिथि नजदीक आने के कारण किसानों में अब आक्रोश और डर बढ़ता जा रहा है। महासमुंद जिले में इस वर्ष धान विक्रय के लिए उत्साहजनक आंकड़े सामने आए हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


अन्य पोस्ट