महासमुन्द

संविधान में समय-समय पर संशोधन संभव है, लेकिन संस्कृति में संशोधन नहीं होता-पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ
16-Dec-2025 4:04 PM
संविधान में समय-समय पर संशोधन संभव है, लेकिन संस्कृति में संशोधन नहीं होता-पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ

कहा सत्य को सामने लाने में बुद्धिजीवियों और पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण

 विभिन्न विषयों पर रखे विचार

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 16 दिसंबर। तीन दिवसीय प्रवास पर महासमुंद पहुंचे प्रखर राष्ट्रवादी विचारक एवं चिंतक पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने राष्ट्र, संस्कृति, संविधान, समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश भौगोलिक संरचना है, जबकि राष्ट्र संस्कृति का वाहक होता है। उनके अनुसार संविधान में समय-समय पर संशोधन संभव है, लेकिन संस्कृति में संशोधन नहीं होता।

उन्होंने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में रामायण के अनेक रूप प्रचलित हैं और विभिन्न क्षेत्रों में इसके अलग-अलग संस्करण मिलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति में होना चाहिए।

पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि जो बदला नहीं जा सकता, उसके बदलने पर लोग प्रश्न नहीं करते, जबकि जो बदला जा सकता है, उसके बदलने पर प्रश्न किए जाते हैं। उन्होंने संविधान और रामायण के संदर्भ में अपनी यह बात रखी। उन्होंने सैक्युलर शब्द की व्याख्या के संदर्भ में डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख किया और कहा कि भारत में विभिन्न पंथों और पूजा पद्धतियों के लोग रहते हैं।

आज सुबह सर्किट हाउस में उन्होंने ‘छत्तीसगढ़’ से एक मुलाकात में कहा कि देश में राष्ट्रवाद पर विचार की आवश्यकता है और युवाओं को तथ्यों के साथ सामने आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार शब्दों के वास्तविक अर्थ जाने बिना चर्चा की जाती है और समाज में भ्रम की स्थिति बनती है। उनके अनुसार सत्य को सामने लाने में बुद्धिजीवियों और पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

 

उन्होंने कहा कि उनकी यात्राओं का उद्देश्य लोगों के सामने तथ्य रखना है। मंदिरों में आरक्षण के विषय पर उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि समाज में इस पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनजागरण के माध्यम से लोगों तक जानकारी पहुंचाना आवश्यक है। राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय में उन्होंने कहा कि समाज को सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सनातन धर्म, राजनीति और समाज के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संगठन और राजनीतिक दल समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन राष्ट्र सर्वोपरि है।

यह भी उल्लेख किया गया कि सर्व समाज महासमुंद जिला के आमंत्रण पर पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ सोमवार शाम महासमुंद पहुंचे। प्रवास के दौरान उन्होंने सिरपुर का भ्रमण किया, नगर में उनसे विभिन्न संगठनों के लोगों ने मुलाकात की और सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम किया। मंगलवार शाम शंकराचार्य भवन में एक सभा आयोजित की गई। उनके बुधवार को रायपुर रवाना होने की संभावना है।

‘छत्तीसगढ़’ से बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्होंने पत्रकारिता छोडऩे के कारणों और अपने वर्तमान कार्यों के बारे में अपनी बात रखी। उन्होंने राष्ट्र, राष्ट्रीयता और समाज से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए और लोगों से अपनी भूमिका और सामथ्र्य पहचान कर कार्य करने की अपील की।


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