महासमुन्द
अन्य जिले या प्रांतों से आने वाले धान की आवक रोकने निगरानी दल गठित
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद,16 नवंबर। राज्य शासन द्वारा चालू खरीफ विपणन वर्ष में धान उपार्जन का कार्य आगामी 1 दिसंबर से प्रारंभ किया जाएगा। इस संबंध में कलेक्टर डोमन सिंह ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारी के संबंध में कल जिला कार्यालय के सभाकक्ष में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, खाद्य, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, कृषि, मंडी, मार्कफेड सहित संबंधित विभाग के अधिकारियों की बैठक ली।
उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक धान उपार्जन केन्द्रों के लिए पृथक से नोडल अधिकारी नियुक्त करें, जो सतत रूप से धान के आवक.जावक पर निगरानी रखेंगे। नोडल अधिकारी धान एवं बारदाना के अंतिम स्टॉक का सत्यापन करें तथा स्टॉक पंजी, ऑनलाईन रिकार्ड से मिलान भी करें। धान खरीदी केन्द्रों में खरीदे गये धान की एवं भण्डारित बारदानों की व्यवस्थित स्टेकिंगए संधारण सुनिश्चित करें। ताकि इनका भौतिक सत्यापन सुविधाजनक रूप से किया जा सके। बारदाना अथवा धान का स्टॉक का मिलान न होने पर समिति एवं सर्वसबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाए। कलेक्टर ने धान खरीदी के लिए उपार्जन केंद्रों के माध्यम से किसानों के लिए टोकन नोडल अधिकारी की निगरानी में जारी किया जाए। इन सभी केन्द्रों में सूर्यास्त के पश्चात् धान की आवक.जावक पूर्णत: प्रतिबंधित किया जाए। सूर्यास्त के पूर्व ही उपार्जित धान की सिलाई व स्टेकिंग आदि कार्य पूर्ण कराया जाए।
धान उपार्जन केंद्रों में उपार्जित धान की खरीदी दिवस में ही भराई व सिलाई एवं बोरों की स्टेकिंग कराई जाए। इन सभी केन्द्रों में धान लेकर आने वाले वाहनों के प्रकार नंबर आदि का किसानवार विवरण पृथक पंजी में संधारित किया जाये ताकि आवश्यकतानुसार इनका सत्यापन किया जा सकें।
उन्होंने कहा कि सभी उपार्जन केन्द्रों में ग्रीष्मकालीन धान एवं पुराने धान के बिक्री के प्रयासों समुचित जांचए निगरानी व रोकथाम की जाए। जिले के सीमावर्ती उपार्जन केन्द्रों में अंतर्राज्यीय धान परिवहन की विशेष निगरानी रोकथाम की जाए। साथ ही राज्य की सीमा से आयात होने वाले धान के संबंध में शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाए। स्थानीय कोचियों को चिन्हांकित कर नियमित जांच की जाए एवं निर्धारित मात्रा से अधिक धान पाये जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करें।
इस खरीफ वर्ष में धान उपार्जन के लिए नए जूट बारदानों के साथ.साथ विगत वर्ष की भांति मिलर के पुराने बारदाने, पीडीएस बारदानें एवं एचडीपीई बारदानों का उपयोग धान खरीदी हेतु किया जाएगा। जिला स्तर पर मिलर के पुराने बारदाने एवं पीडीएस बारदानों के संकलनए सत्यापन किया गया है। लक्ष्य अनुसार शत-प्रतिशत बारदानों का संकलनए सत्यापन सुनिश्चित करें ताकि धान खरीदी प्रभावित न हो। खरीफ विपणन वर्ष में प्रारंभ से ही धान उपार्जन के लिए किसानों के बारदानों का उपयोग धान खरीदी में किया जाएगा। धान उपार्जन केन्द्रों में गतवर्ष की धान खरीदी के आधार पर प्रतिदिवस लगने वाले बारदानों का आंकलन कर उपार्जन हेतु बारदानों की समितिवार उपल4धता सुनिश्चित करें। धान उपार्जन केंद्रो तथा संग्रहण केंद्रों में धान खरीदी प्रारंभ होने के पूर्व समस्त तैयारियां पूर्ण करें।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को धान विक्रय के लिए पंजीयन तथा गिरदावरी के रकबे, भू-अभिलेखों की जांच करने के निर्देश दिए। उपार्जन केन्द्र पर सभी प्रकार की आवश्यक व्यवस्था, जैसे साफ.सफाई, बिजली, पानी, इंटरनेट, केप कवर ,ड्रेनेज सिस्टम, चबुतरा, आद्र्रतामापी यंत्र, तौलबांट, पहुंच मार्ग समतलीकरण कार्य, किसानों के लिए टोकन की व्यवस्था तथा समय पर बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिले में खरीफ विपणन इस वर्ष उपार्जन केन्द्रों में एक प्रतिशत से अधिक धान की सूखत आयी है। इन केन्द्रों में विशेष निगरानी रखने के लिए अधिकारियों.कर्मचारियों की ड्यूटी लगायी जा रही है। जिले में धान के अवैध परिवहन एवं संग्रहण पर नियंत्रण रखने के लिये प्रत्येक तहसील में तहसीलदार के नेतृत्व में खाद्य निरीक्षक, सहकारिता निरीक्षक एवं मंडी सचिव का विशेष जांच दल गठित किया गया है। जिले में राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में जांच चौकियों की स्थापना कर राजस्व विभाग, मंडी विभाग, वन विभाग, जिला सेनानी विभाग एवं पंचायत विभाग की ड्यूटी लगाई गयी है। जिले में संचालित उपार्जन केन्द्रों के लिये नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है तथा उपार्जन केन्द्रवार निगरानी समितियों के गठन की कार्रवाई की जा रही है।


