महासमुन्द

रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना से पिथौरा के 28 स्कूल वंचित
06-Feb-2026 3:51 PM
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना  से पिथौरा के 28 स्कूल वंचित

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

पिथौरा, 6 फरवरी। केंद्र सरकार की रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना के तहत बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाना है, लेकिन पिथौरा विकासखंड के लगभग 28 स्कूल इस योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। बताया जा रहा है कि महासमुंद जिले में अन्य जिलों की तुलना में अलग मापदंड लागू किए जाने के कारण यह स्थिति बनी है। इसे लेकर जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की मांग की जा रही है।

जानकारी के अनुसार विकासखंड के 28 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में अध्ययनरत बालिकाओं को इस योजना के तहत आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जाना था। लेकिन प्रशिक्षकों की नियुक्ति और मापदंड तय करने में देरी के कारण यह प्रशिक्षण समय पर शुरू नहीं हो सका।

वर्तमान स्थिति यह है कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, जबकि महासमुंद जिले में अब जाकर कराटे ब्लैक बेल्ट प्रशिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि प्रशिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी, जिससे इस सत्र में प्रशिक्षण देना संभव नहीं हो पाएगा।

 

जिले में 183 स्कूल, प्रशिक्षकों की कमी

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, समग्र शिक्षा जिला महासमुंद से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ रायपुर के पत्र क्रमांक 3583 के तहत जिले के 183 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण आयोजित किया जाना है।

कार्यालय द्वारा जारी मापदंडों के अनुसार प्रशिक्षक की योग्यता 12वीं उत्तीर्ण और कराटे में ब्लैक बेल्ट होना अनिवार्य रखा गया है। साथ ही एक प्रशिक्षक को केवल एक ही स्कूल में प्रशिक्षण देने की शर्त रखी गई है। प्रशिक्षकों के लिए 30 दिन का मानदेय 5000 रुपये निर्धारित किया गया है।

सूत्रों के अनुसार अन्य जिलों में इस तरह के मापदंड लागू नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि पूर्व वर्षों में भी महासमुंद जिले में ऐसे नियम नहीं थे। उनका तर्क है कि जिले में 183 अलग-अलग प्रशिक्षकों की उपलब्धता संभव नहीं है, क्योंकि इतनी संख्या में ब्लैक बेल्ट प्रशिक्षक जिले में उपलब्ध नहीं हैं।

यह भी बताया जा रहा है कि विज्ञापन के अनुसार केवल महासमुंद जिले के मूल निवासी प्रशिक्षक ही आवेदन कर सकते हैं, जिससे अन्य जिलों के प्रशिक्षकों की सेवाएं लेने का विकल्प भी नहीं बचता। इस कारण योजना का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।

अन्य जिलों में प्रशिक्षण पूरा, महासमुंद में देरी

सूत्रों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इस योजना के तहत प्रशिक्षण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि महासमुंद जिले में प्रक्रिया अभी भी प्रारंभिक चरण में है। बोर्ड परीक्षाओं के निकट होने के कारण इस सत्र में बालिकाओं को प्रशिक्षण मिल पाना कठिन माना जा रहा है। योजना का उद्देश्य बालिकाओं को आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाना है, लेकिन जिले में लागू किए गए मापदंडों और देरी के कारण बड़ी संख्या में छात्राएं इस प्रशिक्षण से वंचित रह सकती हैं। इस संबंध में जिला शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


अन्य पोस्ट