महासमुन्द

मल्टी एक्टीविटी सेंटर के रूप में विकसित हो रहा गौठान महिलाओं को मिल रही स्वावलंबन की राह
08-Sep-2021 8:01 PM
मल्टी एक्टीविटी सेंटर के रूप में विकसित हो रहा गौठान महिलाओं को मिल रही स्वावलंबन की राह

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 8 सितम्बर। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी से महासमुंद जिले के 131 गौठानों  में 464 महिला स्व सहायता समूहों के 3956 सदस्यों को रोजगार के साथ.साथ स्वावलंबन की राह मिल रही है। गौठान के माध्यम से जहां स्वसहायता समूह की ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक छोटे-छोटे व्यवसाय से सशक्त हो रही हैं। गौठानों को मल्टी एक्टिविटी केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाकर काम किया जाकर विभिन्न आजीविका गतिविधियां वहां संचालित करके वर्मी खाद बनाने में लगे समूह की महिलाओं की आय के स्रोत बढ़ाए गए हैं। इसमें उद्यानिकी फसल, सब्जी उत्पादन के लिए किट, गोबर से गोकाष्ट, दीया, अगरबत्ती, मशरूम उत्पादन इकाई, सीमेंट पोल निर्माण, मुर्गी, बकरी, मछली, पशु-पालन, दोना-पत्तल की इकाई, पेन निर्माण, बांस शिल्प, टेरा कोटा, सिलाई जैसे कार्य गौठानों में संचालित किये जा रहे हैं। ताकि गांवों को इंडस्ट्रीयल पार्क के रूप में विकसित किया जा सके।

पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के प्रयास से जिले के आदर्श गौठानों में स्वसहायता समूह की महिलाओं को सतत् रूप से रोजगार का जरिया उपलब्ध कराते हुए उन्हें स्वावलंबी बनाने का पुरजोर प्रयास किया जा रहा है और इसमें सफलता भी मिलने लगी है। विभिन्न आजीविका गतिविधियां कर इन 464 महिला स्वसहायता समूहों के 3956 सदस्यों ने अब तक कुल एक करोड़ 66 लाख 90 हजार 278 रुपए की राशि कमाई है।

जिले के गौठानों में मल्टी एक्टिविटी केंद्रों पर संचालित विभिन्न रोजगार मूलक गतिविधियों में 132 महिला समूहों के 1350 सदस्यों ने अभी तक कुल 47 लाख 69 हजार 871 किलोग्राम वर्मी खाद उत्पादन कर 99 लाख 76 हजार 113 रुपए का लाभ प्राप्त किया है। वही 39 समूहों के 345 सदस्यों ने अभी तक कुल 15 हजार 519 किलो सब्जी उत्पादन कर 6 लाख 74 हजार 130 रुपए कमाए। इसी प्रकार 13 महिला समूहों के 123 सदस्यों ने अभी तक कुल 569 किलो मशरूम उत्पादन कर 1 लाख 49 हजार रुपए में बेचा है।

इसी प्रकार 32 समूहों के 300 सदस्यों ने 17 हजार 624 किलो मछली उत्पादन कर 7 लाख 34 हजार रुपए में बेचा है। महिला समूहों द्वारा मुर्गी पालन का व्यवसाय भी किया जा रहा है। इन 17 समूह की 132 सदस्यों ने मुर्गी पालन व्यवसाय से अब तक 1 लाख 95 हजार 200 रुपए की आय प्राप्त की। समूह की महिलाएं बकरी पालन से भी जुड़ गयी है। इन 34 समूह के 240 सदस्यों ने बकरी पालन कर 4 लाख 23 हजार रुपए लाभ प्राप्त किया। महिला स्वसहायता की 16 समूह के 112 सदस्यों ने पशु पालन कर 2 लाख 78 हजार 200 लाभ अर्जित किया। पन्द्रह समूहों के 118 सदस्यों ने गोबर से गोकाष्ट, दीया, अगरबत्ती निर्माण कर 38 हजार 950 रुपए में बेचा है। इसी प्रकार 166 समूहों के 1236 सदस्यों ने अचार, साबुन, फिनाइल आदि सामग्री निर्माण कर 42 लाख, 21 हजार 685 रुपए लाभ अर्जित किया है।

 


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