महासमुन्द

राज्य का दूसरा जिला बना महासमुंद जहां एक्टिव केस शून्य
30-Aug-2021 6:04 PM
राज्य का दूसरा जिला बना महासमुंद जहां एक्टिव केस शून्य

कोरोना का शून्य एक्टिव केस होना जिलेभर की जनता के लिए खुशियों से भरा- कलेक्टर

यह भी मानकर चलें कि कोरोना अभी तक पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है-डॉ. अनिरुद्ध 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता 
महासमुंद, 30 अगस्त। पूरे 457 दिन बाद महामसुंद जिले ने कोरोना से जंग जीत ली है। लंबे समय बाद रविवार का दिन जिले के लोगों के लिए बड़ी सौगात लेकर आया। यहां अब कोरोना के एक भी केस नहीं है। मतलब जिले में एक्टिव केस की संख्या अब 0 (शून्य) हो चुकी है। जिले के सबसे बड़े कोविड अस्पताल के सभी बेड अब खाली हो चुके हैं। बीते 16 महीनों में महासमुंद जिले में कोरोना के कुल 31 हजार 338 पॉजिटिव मामले सामने आए और 366 की मौत हो गई। जिले भर में कुल 3 लाख 93 हजार 358 लोगों की जांच की गई। इसमें 2 लाख 58 हजार 515 एंटीजेन के, आरटीपीसीआर के 86 हजार 076 और ट्रू नाट के 48 हजार 770 सैंपल की जांच शामिल हैं। 

बताना जरूरी है कि 23 मार्च 2020 से वैश्विक महामारी कोरोना के कारण देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया। इसके बाद से कोरोना से निपटने के लिए लगातार प्रयास शुरू हुआ। महासमुंद जिले में कोरोना का पहला मरीज 29 मई 2020 को मिला। इसी दिन बसना ब्लॉक के ग्राम संतपाली निवासी एक व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद से कोरोना संक्रमण का दायरा जिले में लगातार बढ़ता गया।

कोरोना की जंग से हुई जीत में सबसे ज्यादा योगदान कोरोना टीका का रहा। महासमुंद जिले में 7 लाख 70 हजार 275 लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य निर्धारित है। इनमें से 5.50 लाख से अधिक लोगों को पहले डोज का टीका लग चुका है, जो लक्षित आबादी का 75 फीसदी है। इसी दूसरी डोज के तहत 22 फीसदी लोगों को टीका लगा है, जो 1.55 लाख है।

शुरुआती दिनों से ही जिले में कोरोना संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए लगातार टेस्टिंग पर जोर दिया गया। इसके साथ ही ट्रेसिंग पर सबसे ज्यादा जोर मेडिकल टीम ने दिया। यानि पॉजिटिव के संपर्क में आने वालों की पहचान करना, उनका टेस्ट करना और उन्हें आइसोलेट करना। ताकि संक्रमण का फैलाव न हो। इसके साथ ही यदि कोई पॉजिटिव आता तो त्वरित इलाज शुरू करना भी प्राथमिकता में रही।

महासमुंद जिले में कोरोना के शुरुआत के साथ ही जिले के सभी बॉर्डर को सील कर दिए गए। महासमुंद का बड़ा इलाका ओडिशा की सीमा से जुड़ता है। ऐसे में अन्य राज्यों से आने वाले व्यक्तियों की जांच प्रमुखता से की गई। कोरोना की दूसरी लहर के समाप्त होने के बाद भी सरायपाली के सीमावर्ती और बागबाहरा के सीमावर्ती जांच नाका स्थापित कर लोगों की जांच की गई। साथ ही वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र के बाद ही प्रवेश दिया गया।

इस दौरान जिला प्रशासन ने तय कर दिया कि जिले के शहरी क्षेत्रों में प्राथमिकता के साथ 100 फीसदी वैक्सीनेटेड किया जाए। क्योंकि बड़ी संख्या में ग्रामीण किसी न किसी कारण से शहरी क्षेत्र में जरूर आते हैं। ऐसे में कम से कम शहरी आबादी को वैक्सीन लग जाए तो संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है। अब जिले के सभी नगरीय निकाय शहरी क्षेत्र की 100 फीसदी आबादी को वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है।

कलेक्टर डोमन सिंह ने कहा है कि कोरोना का शून्य एक्टिव केस होना जिलेभर की जनता के खुशियों से भरा है। कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए स्वास्थ्य अमला और जिला प्रशासन की टीम ने लगातार काम किया है। हमने पहले ही टारगेट तय कर लिया था कि सभी निकाय 100 फीसदी वैक्सीनेटेड हो जाए। इसमें सफल होने के बाद अब विकासखंडों में शत प्रतिशत वैक्सीनेशन को लेकर काम जारी है। अगले दो से तीन दिनों में सरायपाली विकासखंड 100 फीसदी वैक्सीनेटेड वाला पहला विकासखंड हो जाएगा। ओडिशा से सटे हुए ब्लॉक को पहले वैक्सीनेटेड के टारगेट पर हम काम कर रहे हैं। क्योंकि ऐसे ब्लॉक के लोगों का ओडिशा में आना-जाना लगा रहता है।

कोरोना नियंत्रण दल के नोडल अफसर डॉ. अनिरुद्ध कसार और सर्विलांस टीम के प्रमुख डॉ. छत्रपाल चंद्राकर का कहना है कि ये हमारे लिए खुशी की बात है कि आज 16 महीने बाद हमारा जिला कोरोना फ्री हो गया है। लेकिन यह भी मानकर चलें कि कोरोना अभी तक पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए मास्क का उपयोग करें। भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें और सामाजिक दूरी का पालन जरूर करें। साथ ही वैक्सीन जरूर लगवाएं।
 


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