महासमुन्द

शरीर छलनी होने के बाद भी नक्सलियों से लड़ते रहे घनश्याम
21-Aug-2021 9:30 PM
  शरीर छलनी होने के बाद भी नक्सलियों से लड़ते रहे घनश्याम

  10वीं पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि   

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद, 21 अगस्त। महासमुंद जिला मुख्यालय के निकट के गांव बिरकोनी के वीर शहीद घनश्याम कन्नौजे को आज उसकी जन्मभूमि याद कर रही है। आज 21 अगस्त को शहीद घनश्याम कन्नौजे की 10वीं पुण्यतिथि है, जब उन्होंने माओवादियों से लोहा लेते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी। गृह ग्राम बिरकोनी के हाईस्कूल में उनकी प्रतिमा स्थापित है, जहां उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने बड़ी संख्या में लोग आते हैं।

गौरतलब है कि एएसएफ  की दूसरी बटालियन सकरी बिलासपुर के आरक्षक क्रमांक 111 घनश्याम कन्नौजे नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के भद्राकाली में तैनात थे। इसी दौरान 19 अगस्त 2011 को फोर्स की एक टुकड़ी कैंप के लिए रसद लाने के लिए निकली थी। इस टुकड़ी के जवान रास्ते पर नक्सलियों के एंबुश में फंस गए। धमाके के साथ नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। धमाके में ही कई जवान जख्मी हो गए थे, किंतु जवानों ने जोरदार जवाबी कार्रवाई की। शरीर छलनी होने के बाद भी जवान नक्सलियों से लड़ते रहे और इसी में 13 जवान शहीद हो गए, जिनमें घनश्याम कन्नौजे भी शामिल थे।

इसके बाद 20 अगस्त को उनका शव मिला और 21 अगस्त को उनके गृहग्राम बिरकोनी में शासकीय हाईस्कूल मैदान में, जहां उन्होंने शिक्षा पाई थी, पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद को अंतिम विदाई देने पूरा गांव उमड़ पड़ा था। शहीद घनश्याम कन्नौजे का जन्म 6 अक्टूबर 1988 को ग्राम बिरकोनी में हुआ था।

शहीद के पिता गुलाब कन्नौजे इस वक्त कृषि कार्य के साथ गलियों में घूमकर मनिहारी सामान बेचते हैं।  शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला बिरकोनी और आदर्श स्कूल महासमुंद में पढ़ाई करने के साथ-साथ घनश्याम खेती और पिता के कारोबार में भी अपने पिता का हाथ बंटाते थे। करीब 20 साल की उम्र में उसने फोर्स जॉइन कर लिया और 23 साल की उम्र पूरी होने से पहले ही वीरगति को प्राप्त हुए।


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