ताजा खबर
बरसों से रायपुर व रतनपुर रोड पर चल रहा अवैध भंडारण का कारोबार
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 7 फरवरी। जिले में रतनपुर तथा रायपुर रोड पर संचालित 20 कोयला डिपो का लाइसेंस कलेक्टर बिलासपुर ने निरस्त कर दिया है। इन कोयला डिपो संचालकों ने पर्यावरण विभाग से एनओसी नहीं ली थी और भंडारण को लेकर खनिज विभाग से अनुबंध नहीं किया था।
जानकारी मिल रही है कि लाइसेंस निरस्त किये जाने के बाद भी ये डिपो सील नहीं किये गये हैं। इससे उनके कारोबार पर असर नहीं पड़ा है। लाइसेंस रद्द करने के पहले कोयला डिपो संचालकों को खनिज विभाग ने दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया था लेकिन वे कार्यालय नहीं पहुंचे।
ज्ञात हो कि पुलिस और खनिज विभाग इन डिपो पर कई बार छापा मारती रही है और वहां पत्थर, गिट्टी तथा बजरी का अवैध भंडारण पाया गया है पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। डिपो बंद करने के आदेश के बाद कुछ दिन बाद फिर खुल जाते हैं। इऩमें मोहतराई, पेंडरवा, बिल्हा, लिम्हा, सकरी बाइपास आदि के कोयला डिपो शामिल हैं। पर्यावरण विभाग द्वारा भी अक्सर इन डिपो को अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया जाता है कि इससे आसपास प्रदूषण फैलने का खतरा नहीं है।
दरअसल, अधिकांश कोयला डिपो चोरी के कोयले से चलते हैं। अनेक उद्योगों को एसईसीएल ने कोयला आबंटित किया है लेकिन वह यह नहीं देखती कि ये उद्योग चालू हैं या नहीं। ऐसे उद्योग कोयला डिपो में अपना माल खपाते हैं। वे इस आधार पर डिपो में कोयला रखने की अनुमति लेते हैं कि उनके औद्योगिक परिसर में इन्हें रखने की जगह नहीं है। फिर इसी कोयले को कम जरूरत वाली उद्योगों और ईंट भट्ठों में बेचा जाता है। इन्हीं डिपो में ट्रकों के ड्राइवर कोयला अनलोड करते हैं। इस समय एक किलो कोयला 6 रुपये में खरीदा जा रहा है। इसके बाद कोयला डिपो से या आसपास के क्रशर प्लांट से दो रुपये किलो में बजरी खऱीदकर वजन बराबर कर लेते हैं। इन सब के लिये एसईसीएल की भी निगरानी टीम बनी है पर प्रायः कार्रवाई नहीं होती है। पुलिस व खनिज विभाग को भी डिपो संचालक हफ्ता पहुंचाते हैं।


