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शादीशुदा महिला से जन्मे बच्चों की कानूनी पहचान पहले पति से ही रहेगी
16-Jan-2026 12:11 PM
शादीशुदा महिला से जन्मे बच्चों की कानूनी पहचान पहले पति से ही रहेगी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 16 जनवरी। पितृत्व तय करने और संपत्ति पर अधिकार से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई महिला पहले से विवाहित है, तो किसी दूसरे पुरुष से जन्मे बच्चों की कानूनी वैधता उसके पहले पति से ही जुड़ी मानी जाएगी, चाहे दूसरा पुरुष बच्चों को अपना माने और महिला के साथ लिव-इन रिश्ते में ही क्यों न रह रहा हो।

यह मामला तब सामने आया, जब दो महिलाओं ने खुद को बिलासपुर के एक नामी व्यवसायी की बेटियां बताते हुए फैमिली कोर्ट में याचिका लगाई।  याचिका में कहा गया कि उनकी मां ने वर्ष 1971 में व्यवसायी से माला-बदली कर विवाह किया था और उसी के बाद उनका जन्म हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि मां के पहले पति 1984 में घर छोड़कर चले गए थे और तब से उनका कोई पता नहीं है। दावा किया गया कि दूसरे पति (जैविक पिता) ने हमेशा उन्हें बेटियों की तरह स्वीकार किया और स्वयं व्यवसायी ने भी अदालत में यह बात मानी।

फैमिली कोर्ट ने कहा कि केवल पितृत्व की स्वीकृति, कानून से ऊपर नहीं हो सकती। कोर्ट के मुताबिक यह साबित नहीं हो पाया कि पहले पति और महिला के बीच संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुके थे या पहले पति की मृत्यु हो चुकी थी। मेडिकल साक्ष्य के जरिए ‘नॉन-एक्सेस’ (पति-पत्नी के बीच संबंध न होना) भी सिद्ध नहीं किया जा सका।
ऐसी स्थिति में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5 और 11 के तहत दूसरा विवाह शून्य माना जाएगा।

फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति एके प्रसाद की खंडपीठ ने अपील खारिज कर दी।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आधार कार्ड समेत अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में बच्चों के पिता के रूप में पहले पति का ही नाम दर्ज है।

 


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